बांदा। उम्रदराज और शरीर से कमजोर पेंशनर को अब जीवित
होने का प्रमाण देने के लिए कोषागार या बैंक में हाजिरी नहीं देना पड़ेगी।
उनका घर बैठे ही सत्यापन होगा।
साथ ही अब पेंशनर जीवित होने का
प्रमाणपत्र कभी भी दे सकेंगे। अभी तक नवंबर में ही देने की व्यवस्था थी। यह
जानकारी मुख्य कोषाधिकारी विनोद कुमार ने बृहस्पतिवार को कलेक्ट्रेट
सभागार में हुई पेंशनर्स दिवस पर गोष्ठी में दी।
उन्होंने बताया कि
पेंशनर यदि जिले से बाहर रह रहे हैं तो वे अपने निवास स्थान के नजदीक
स्थित बैंक शाखा में जीवित प्रमाणपत्र जमा कर सकते हैं।
जिन पेंशनर
का परिचय पत्र नहीं बना है, वे जनवरी के दूसरे हफ्ते में कोषागार में
संयुक्त फोटो जमाकर परिचय पत्र हासिल कर लें। पेंशन के प्रथम भुगतान की
तिथि से 15 वर्ष के बाद पेंशन की पुनर्स्थापना कोषागार में कंप्यूटर से
स्वत: हो जाती है।
इसके लिए किसी अर्जी की जरूरत नहीं है। बताया
कि पारिवारिक पेंशनरों के मामले में आयु का साक्ष्य जैसे मतदाता पहचान
पत्र, पैन कार्ड आदि अथवा कोई साक्ष्य उपलब्ध न होने पर सीएमओ द्वारा जारी
आयु प्रमाणपत्र से भी अतिरिक्त पेंशन का लाभ दिया जाएगा।
अध्यक्षता
कर रहे डीएम सुरेश कुमार ने कहा कि पेंशनरों की समस्याएं और लंबित मामले
जल्द निपटाए जाएंगे। कहा कि कोषागार संबंधी जानकारी के लिए कोषाधिकारी से
फोन पर भी संपर्क किया जा सकता है।
उत्तर प्रदेश राजकीय सिविल
पेंशनर्स परिषद जनपद अध्यक्ष रामबिहारी लाल निगम और सेवानिवृत्त प्राथमिक
शिक्षक संघ अध्यक्ष कन्हैयालाल दीक्षित ने पेंशनरों के लिए कलेक्ट्रेट
परिसर में सभागार की मांग की।
रिटायर्ड अमीन प्रहलाद प्रसाद और
कलेक्ट्रेट के जागेश्वर प्रसाद पाल के पिता और कृषि विभाग के रतन कुमार के
दावों और बकाया भुगतान की मांग की गई।
डिप्लोमा इंजीनियर्स कल्याण संघ के रामदत्त पांडेय ने रिटायर्ड एई रमेश चंद्र के पेंशन का मामला निस्तारित करने का अनुरोध किया।
सिटी
मजिस्ट्रेट आरके श्रीवास्तव, पुलिस उपाधीक्षक विनोद कुमार, जिला विकास
अधिकारी श्रीकृष्ण त्रिपाठी, वित्त एवं लेखाधिकारी बीके तिवारी और अशोक
पांडेय भी मौजूद रहे। संचालन मुईन राही ने किया।