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वसंत पंचमी आई, धरती मुस्काई

Fri, 23 Jan 2015 11:50 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बांदा
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बुंदेलखंड में कहावत है ‘आई माघ की पांचै, बूढ़ बैलवा नाचै’। ऋतुओं के राजा वसंत पर यही नजारा है। खेत पीले परिधान में सज गए हैं। आम के पेड़ों पर बौर आ गई है। इन्हीं खुशगवार नजारों के बीच शनिवार को वसंत पंचमी मनाई जाएगी।
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वसंत शुरु हुए 4 दिन बीत गए हैं। खेत सरसों के फूलों से सजे-धजे नजर आ रहे हैं। हरियाली पीत में बदल गई है। आम के पेड़ों पर बौर झूम रही है।

किवदंती है कि इस दिन शिक्षा और ज्ञान की शुरुआत करने से नए आयाम हासिल होते हैं। पंचमी को विद्या की देवी सरस्वती से जोड़ा गया है।

जानकारों का मानना है कि वसंत ऋतु में मौसम खुशगवार हो जाने से लोगों का दिलो-दिमाग ताजा रहता है। हालांकि इस वर्ष कड़ाके की ठंड ने वसंत का मजा किरकिरा कर रखा है।

बुजुर्ग बताते हैं कि प्राचीन काल में शिक्षा-दीक्षा की शुरुआत इसी दिन से होती थी। गुरु कुल में प्रवेश भी वसंत पंचमी से होते थे। इस दिन यज्ञोपवीत संस्कार, विशेष गंगा स्नान व अन्य मांगलिक कार्य शुभ माने गए हैं।
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पंडित उमाकांत त्रिवेदी बताते हैं कि वसंत में पीले परिधान पहनना चाहिए। यह रंग आत्म शक्ति और दिल-दिमाग को मजबूत करके शीतलता देता है। शुभ का संकेत भी है पीला रंग।
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