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उर्स में सजी कव्वाली की महफिल

Thu, 22 Jan 2015 11:32 PM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, बांदा
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सूफी संत मिस्कीन शाह वारसी का 96वां सालाना उर्स शुरू हो गया। यह तीन दिन चलेगा। हिंदू-मुस्लिम एकता की पहचान इस उर्स में बड़ी संख्या में कई मजहब के लोग शामिल हुए।
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बृहस्पतिवार को उर्स की शुरुआत सुबह नवाब टैंक रोड स्थित दरगाह परिसर में सामूहिक कुरानख्वानी से हुई। मजार को गुस्ल देकर संदल और चादरपोशी और फतेहाख्वानी हुई।

दोपहर बाद ईदगाह चौराहा के पास स्थित मरहूम सगीर हुसैन वारसी (सग्गन मास्टर) के आवास से गागर जुलूस दरगाह के लिए रवाना हुआ। कव्वालों ने कव्वालियां पेश की। पीले वस्त्रधारी अकीदतमंद जुलूस में शामिल रहे। जुलूस कुछ देर दरगाह मुतवल्ली कसीमुद्दीन वारसी के गूलरनाका स्थित आवास पर रुका।
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यहां कव्वालियां हुईं। बाद में विभिन्न मार्गों से होता हुआ देर शाम दरगाह पहुंचा। रात में कव्वालियां हुईं। इस मौके पर मुन्ने शाह (लखनऊ), सायम शाह (कानपुर), शोहराब शाह (खंडेहमऊ) सहित जमाल शाह, अजमल शाह, हसीन शाह, फैजान वारिसी, अली हसन, शमीम, नम्मू, शफीक, शाहिद, इसाइल, रामायण वारसी आदि शामिल रहे। शुक्रवार को रस्म गागर व रात में कव्वालियां होंगी।
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