बांदा। गोली से घायल बालिका के इलाज के मामले में प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग और कुछ अन्य लोगों के रवैए से क्षुब्ध जिला अस्पताल के सर्जन डा. अनुराग श्रीवास्तव ने त्याग पत्र दे दिया है। दूसरी तरफ अस्पताल में रात भर बालिका का इलाज न करने के लापरवाह डाक्टर या कर्मचारियों पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। कालिंजर थाना क्षेत्र के नौगवां निवासी लालमनी (12) पुत्री राजाराम के पैर में रविवार को जंगल में मवेशी चराते समय कहीं से चली गोली लग गई थी। उसे नरैनी सीएचसी से रात को जिला अस्पताल भेजा गया था। यहां इमर्जेंसी में ड्यूटी पर तैनात डाक्टर ने इलाज न करके उसे वापस नरैनी भेज दिया गया था। सोमवार को बालिका को नरैनी से फिर जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया। लालमनी के पिता ने बताया कि जिला अस्पताल में एक व्यक्ति उसे अस्पताल के डाक्टर के घर ले गया और वहां बैठा दिया।
इसी बीच डीएम से शिकायत कर दी गई कि अस्पताल के डाक्टर बालिका को इलाज के लिए अपने घर ले गए हैं। डीएम के निर्देश पर सीएमओ व सीएमएस ने बालिका को अस्पताल लाकर भर्ती कराया। इस मामले में अपने ऊपर यह आरोप लगने कि बालिका को वह अपने आवास ले गए थे, क्षुब्ध जिला अस्पताल के सर्जन डा.अनुराग श्रीवास्तव ने इस्तीफा दे दिया। उन्होंने बताया कि बालिका और उसके परिजन उनके दरवाजे लाकर साजिशन बैठाए गए थे। उन्होंने कोई इलाज नहीं किया। डा.अनुराग ने अपना इस्तीफा स्पीड पोस्ट के जरिए सीएमएस को भेजा है। इसकी पुष्टि उन्होंने खुद की। बताया कि इस साजिश में मुख्य भूमिका निभाने वाले एक दवा कंपनी के प्रतिनिधि (एमआर) हैं। वह अपनी कंपनी की दवा लिखने को उन पर दबाव डालते हैं। ऐसा न करने पर उन्हें बदनाम करने की यह सब चाल चली गई है। उधर, मंगलवार को सीएमएस डा. किशोरीलाल ने कहा कि अभी तक डा. अनुराग का त्याग पत्र उन्हें नहीं मिला।