फोटो - 14 तहसील में एसडीएम को पत्र सौंपते अधिवक्ता। संवाद
- फोटो : जर्जर स्थिति में शहर का पुराना घंटाघर। संवाद
पैलानी। तहसील के अधिवक्ताओं ने शुक्रवार को यूजीसी के इक्विटी रेगुलेशन के नियम पर जमकर नाराजगी जताई। कहा कि केंद्र सरकार जिस कानून को लाने का प्रयास कर रही है, वह समाज को बांटने वाला सिद्ध होगा। नए नियम से सवर्ण समाज के बच्चों को भेदभाव का सामना करना होगा, जो न्यायोचित नहीं है।
संघ के पूर्व व वर्तमान पदाधिकारियों व अधिवक्ताओं ने राज्यपाल को पत्र भेज कर नियम को निरस्त कराने की मांग की है। एसडीएम अंकित वर्मा को सौंपे पत्र में अधिवक्ताओं ने कहा कि वर्तमान में सवर्णों पर छूटे मामलों की बाढ़ सी आ गई है। विश्वविद्यालयों में भी यही होगा। कहा कि जब विश्वविद्यालयों में एंटी रैगिंग, एससी-एसटी एक्ट पूर्व से लागू हैं तो इस कानून का क्या उद्देश्य है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार को यह नियम संसद से निरस्त कराना चाहिए।
कहा कि कानून वापस न लिए जाने पर सभी सवर्ण आगे की रणनीति तय करेंगे। इस दौरान अधिवक्ता संघ के पूर्व अध्यक्ष चंद्रभान सिंह, महासचिव अशोक सिंह चौहान, देवेंद्र सिंह, श्रवण कुमार गुप्त, दीपेंद्र सिंह, राजीव कुमार, शिव प्रताप चंदेल, वीरेंद्र पाल सिंह, अभिषेक सिंह, गंगा शरण सिंह, रामप्रकाश सिंह, जितेंद्र कुमार, प्रदीप कुमार, सीताशरण, शैलेंद्र सिंह समेत बड़ी संख्या में अधिवक्ता मौजूद रहे।