बांदा। मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश के लिए केन-बेतवा लिंक परियोजना में जहां एक ओर बुंदेलखंड के विख्यात पन्ना टाइगर रिजर्व को उजाड़ने की तैयारी है, वहीं दूसरी तरफ यहां दुर्लभ बाघों के कुनबे में तेजी से वृद्धि हो रही है। इसे संयोग कहें या प्रकृति का करिश्मा कि पन्ना टाइगर को खत्म करने की कवायद के बीच बीते तीन माह में यहां 13 बाघ शावकों का जन्म हुआ है। यहां की खूबसूरत बाघिन टी-6 ने हाल ही में चार शावकों को जन्म दिया है।
लगभग 10 वर्ष की यह बाघिन छठवीं बार मां बनी है। अब पन्ना टाइगर में बाघों का आंकड़ा लगभग 70 की संख्या पार कर गया है। केन-बेतवा लिंक में पन्ना टाइगर रिजर्व में बांध बनेगा। बुंदेलखंड में स्थित पन्ना रिजर्व टाइगर (एमपी) बाघों के संरक्षण का मुख्य स्थल है। केन-बेतवा लिंक में पन्ना टाइगर रिजर्व पार्क को शामिल कर लिए जाने से यहां रह रहे बाघ, गिद्ध आदि सहित अन्य वन्य जीव-जंतुओं के अड्डे उजड़ जाएंगे। हालांकि, सरकार इन्हें अन्य स्थानों पर विस्थापित करने की बात कह रही है। उत्तर प्रदेश और मध्यप्रदेश सहित देश के अनेकों पर्यावरण के पैरोकार योजना का लगातार विरोध कर रहे हैं। इन्हीं सबके बीच यहां बाघों का कुनबा तेजी से बढ़ रहा है। हाल ही में एक बाघिन ने अपने छठवें प्रसव में पांच शावकों को जन्म दिया है। सभी शावक पूरी तरह स्वस्थ हैं। टाइगर ट्रैकिंग दल ने हाल ही में बाघिन को अपने शावकों के साथ यहां विचरण करते देखा और कैमरों में कैद किया।
बाघिन 17 शावकों को दे चुकी है जन्म
पन्ना टाइगर रिजर्व के संचालक उत्तम कुमार शर्मा ने बताया कि बाघों को फिर बसाने की योजना के तहत वर्ष 2014 में बाघिन टी-6 को यहां लाया गया था। तब यह तीन वर्ष की थी। अब इसकी उम्र करीब 10 वर्ष की हो गई है। संचालक के मुताबिक, यह बाघिन अब तक 17 शावकों को जन्म दे चुकी है। बाघों की वंश वृद्धि में यह सबसे अव्वल है। बाघिन मां और उसके सभी बच्चे/शावक स्वस्थ हैं। उन्होंने बताया कि इस समय यहां करीब 20-25 बाघ शावक हैं। सभी उम्र के बाघों की संख्या 70 से ज्यादा हो चुकी है।
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बॉयोस्फीयर रिजर्व की वैश्विक सूची में पार्क
पन्ना टाइगर रिजर्व वन क्षेत्र को यूनेस्को ने मैन एंड बायोस्फीयर प्रोग्राम के तहत बॉयोस्फीयर रिजर्व की वैश्विक सूची में शामिल किया है। विंध्य पर्वत श्रेणी में स्थित पन्ना टाइगर रिजर्व पार्क के कोर क्षेत्र में 43.40 मीटर ऊंचा और 1468 मीटर लंबा बांध बनाया जाना प्रस्तावित है। दोधन गांव के पास बन रहे इस बांध से करीब 231 किलोमीटर लंबी नहर बनाकर इसका पानी बेतवा (झांसी) नदी तक पहुंचाया जाएगा। केंद्र और राज्य सरकारें भले ही इस योजना से यूपी-एमपी के बुंदेलखंड में पानी का संकट कम होने का दावा कर रही हैं, लेकिन पर्यावरण कार्यकर्ता इससे पन्ना टाइगर रिजर्व पार्क के अस्तित्व को खतरा जताते हुए घाटे का सौदा बता रहे हैं।
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भाजपा की पूर्व मंत्री भी परियोजना के खिलाफ
केन-बेतवा लिंक परियोजना को लेकर पर्यावरणविद शुरू से ही अपने तर्क और दलीलों के साथ विरोध कर रहे हैं। अब बाघों के कुनबे में हो रही तेजी से वृद्धि पर उनका तर्क है कि प्रकृति भी बाघों का बसेरा उजाड़ने के खिलाफ है। सरकारों को इसका सम्मान करना चाहिए। उधर, इस परियोजना का विरोध सत्तारूढ़ दल भाजपा के नेता भी कर रहे हैं। मध्य प्रदेश की पूर्व कैबिनेट मंत्री और पन्ना जिले की कद्दावर नेता कुसुम सिंह महदेले ने हाल ही में दिए बयान में केन-बेतवा लिंक को पन्ना जिले के लिए घातक बताया है। अपने ट्वीट में उन्होंने कहा कि केन-बेतवा लिंक परियोजना से पन्ना टाइगर रिजर्व पूरी तरह उजड़ जाएगा। यहां बाघों का रहवास खत्म हो जाएगा। पर्यटन व्यवसाय की संभावनाएं भी घटेंगी। बांदा के आरटीआई एक्टिविस्ट और पर्यावरण कार्यकर्ता आशीष सागर दीक्षित का कहना है कि पन्ना टाइगर रिजर्व पार्क में बाघ, मगरमच्छ, गिद्ध आदि संरक्षित हैं। यह सब उजड़ जाएंगे। यह भी दलील दी कि बांधों के भरोसे बुंदेलखंड को पानी से सरसब्ज करने की दलीलें बेमतलब हैं। ललितपुर में स्थित एशिया का सबसे बड़ा बांध इसकी बानगी है।
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पन्ना टाइगर के साथ सात लाख पेड़ भी डूबेंगे
केन-बेतवा लिंक का लगातार विरोध करने वाले लोगों की दलीलें हैं कि करीब 90 वर्ग किलोमीटर में पन्ना टाइगर रिजर्व पानी में डूब जाएगा। इसमें सात लाख से ज्यादा पेड़ भी डूबेंगे। वन्य जीव और उनके प्रजनन स्थल बर्बाद हो जाएंगे। लगभग एक दर्जन गांव भी उजड़ेंगे। केन नदी में बाढ़ के दिनों को छोड़कर आम दिनों में पूरे वर्ष पानी का टोटा रहता है। केन का पानी नहर के जरिए बेतवा में पहुंचाने से बुंदेलखंड के कई जिलों में अकाल जैसे हालात हो सकते हैं। यहां से विस्थापित किए जा रहे ग्रामीणों को उचित मुआवजा भी नहीं दिया जा रहा है।
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30 नदियों को जोड़ने की योजना में केन-बेतवा भी
राष्ट्रीय नदी विकास एजेंसी (एनडब्ल्यूडीए) द्वारा प्रस्तावित देश की 30 नदियों को जोड़ने की परियोजना में केन-बेतवा नदी भी शामिल है। परियोजना में यूपी-एमपी का बुंदेलखंड क्षेत्र शामिल है। एमपी में स्थित गंगऊ बैराज की अपस्ट्रीम में ढाई किमी दूर दोधन गांव के पास 73.2 मीटर ऊंचा ग्रेटर गंगऊ बांध बनेगा। यहां से लगभग 231 किमी लंबी पक्की नहर बेतवा नदी (झांसी) तक बनाई जाएगी। नहर से केन नदी का पानी बेतवा नदी में बरुआ सागर में डाला जाएगा। इनमें 72 मेगावाट क्षमता की दो बिजली परियोजनाएं भी शामिल हैं। नहर के मार्ग में पड़ने वाले 6.45 लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल को सिंचाई के लिए पानी मिलेगा। इनमें 1.55 लाख हेक्टेयर यूपी और 4.90 लाख हेक्टेयर एमपी का इलाका शामिल है। सिंचाई के लिए कुल 31,960 घनमीटर पानी मिलेगा। इसमें 120 लाख घनमीटर पानी पीने और घरेलू इस्तेमाल के लिए होगा। केन-बेतवा लिंक वर्ष 2008 में तैयार की गई थी। हाल ही में यूपी-एमपी के बीच पानी के बंटवारे को लेकर समझौता भी हो गया है।