बांदा। रोडवेज बसों में एक बार फिर मुखबिरों का व्हॉट्सएप ग्रुप सक्रिय हो गया है। कंडक्टर धड़ल्ले से राजस्व चोरी कर रहे हैं। रात की बसों में कुछ ज्यादा ही चोरी हो रही है। यातायात निरीक्षण चेकिंग के नाम पर सिर्फ खानापूरी कर रहे हैं। अफसर एसी में गहरी नींद ले रहे हैं, जबकि शासन के स्पष्ट निर्देश है कि आरएम और एआरएम भी बसों को चेक करें, लेकिन वह कभी नहीं करते। कागजों में बस चेकिंग का मानक पूरा किया जा रहा है।
गर्मी के चलते आरएम व एआरएम चेकिंग पर नहीं जाते हैं। कभी गए भी तो इन पर मुखबिरों की नजर रहती है। सूत्र बताते हैं कि परिचालकों का छह सदस्यों वाला मुखबिर दल है। एक मुखबिर आरएम और दूसरा एआरएम पर नजर रखता है। अन्य चार अतर्रा तिराहा, भूरागढ़, तिंदवारी चौराहा, नरैनी रोड पर नजर रखते हैं। जैसे ही आरएम व एआरएम कार्यालय से बाहर निकलते हैं, इसकी सूचना व्हॉट्सएप ग्रुप पर परिचालकों को दे दी जाती है। इससे परिचालक सतर्क हो जाते हैं।
दो साल पहले तत्कालीन एआरएम लक्ष्मण सिंह ने परिचालकों का व्हॉट्सएप ग्रुप पकड़ा था और कार्रवाई भी की थी। इससे घबराएं रोडवेज कर्मी हड़ताल पर चले गए थे। एक कर्मचारी ने साजिश के तहत रिश्वत लेते एंटी करप्शन टीम से पकड़ा दिया। ताकि न बांस रहे न बांसुरी बजे। इस घटना के बाद से अधिकारी इतने सकते में आ गए कि वह बस चेक करने ही नहीं जाते हैं।
सुलह का बना रहे दबाव
पैसा लेने के बाद टिकट न देने की शिकायत में जांच के नाम पर खानापूरी की जा रही है। एक शिकायतकर्ता ने बताया कि झूठा साबित करने के लिए परिचालक कुछ खास गुर्गों को फर्जी टिकट देकर फर्जी बयान करवा रहा है। यहां तक कि चालक व एसएम कार्यालय के एक लिपिक ने भी झूठे बयान दिए। एआरएम के सामने सुलह का दबाव बनाया गया। बताया कि 16 अप्रैल को कानपुर से बांदा आते समय इंटर सिटी के कंडक्टर अमित शुक्ला ने पैसा लेने के बाद करीब 20 यात्रियों के टिकट नहीं बनाएं। टिकट मांगने पर अभद्रता की। इसकी शिकायत 19 अप्रैल को आरएम से की गई थी।
वर्जन-
समय-समय पर अधिकारी चेकिंग करते हैं। फिर भी जल्द मंडल के एआरएम से क्राॅस चेकिंग कराई जाएगी। राजस्व चोरी करने वाले बख्शे नहीं जाएंगे। -संदीप अग्रवाल, क्षेत्रीय प्रबंधक चित्रकूटधाम मंडल, बांदा।