राजस्व विभाग की टीम ने बृहस्पतिवार को बदौसा में खेतों पर आकर ओला और बारिश से हुए नुकसान का आंकलन किया।
कानूनगो रामविशाल कुशवाहा, लेखपाल पुरुषोत्तम शुक्ला, इंद्रपाल, कौशल्या नंदन पांडेय, रामभवन वर्मा, भोला प्रसाद वर्मा लेखपाल की टीम ने कई घंटे खेतों में भ्रमण कर फसलों का जायजा लिया। हरेक खेत में बाई गई फसल और हुए नुकसान को अपने अभिलेखों में दर्ज किया।
लेखपाल पुरुषोत्तम ने बताया कि बदौसा, बरछा ब, दुबरिया, भुसासी, उदयपुर आदि गांवों में फसलों का 100 फीसदी नुकसान हुआ है। उन्होंने 70 लाख रुपये क्षतिपूर्ति की रिपोर्ट भेजी है। किसान बबलू सिंह, रत्नाकर सिंह, छोटेलाल खटिक, खिलाड़ी आदि मौजूद रहे।
उधर, सदर तहसील के पडुई गांव के किसानों ने डीएम को अर्जी देकर कहा है कि सर्वे करने आए लेखपाल ने मौके पर जाकर खेत नहीं देखे। यह कहकर टाल दिया कि उन्होंने रास्ते पर ही चलते हुए आंकलन कर लिया है। लेखपाल 30 से 35 फीसदी नुकसान बता रहे हैं जबकि किसानों का कहना है कि कम से कम 80 फीसदी का नुकसान हुआ है।
इस गांव में कई किसान इन्हीं हालात में पूर्व में आत्महत्याएं कर चुके हैं। ग्राम प्रधान गोविंद यादव सहित किसानों ने मांग की किसी अन्य अधिकारी से सर्वे कराया जाए।
बीमा कंपनी ने किया सर्वेक्षण
बांदा। राष्ट्रीय कृषि बीमा योजना के तहत नामित संस्था एचडीएफसी अर्गो लिमिटेड कर्मियों ने अतर्रा व नरैनी तहसील क्षेत्र के गांवों का निरीक्षण कर बारिश और ओलावृष्टि से हुए नुकसान का जायजा लिया। बीमा कंपनी सर्वेयर ताहिर हुसैन व रवि सेंगर ने कृषि विभाग के कर्मचारियों के साथ दुबरिया, भुसासी समेत आधा दर्जन गांवों में भ्रमण किया।
सर्वे टीमें नरैनी क्षेत्र में नंदवारा, मुगौरा, चंदौर, बरछा ब, अतर्रा क्षेत्र में लौली, पुनाहुर, सिकलोढ़ी, मकरी, गोखिया, लोधिन पुरवा व सदर तहसील के खप्टिहाकलां, महुई, मूंगुस, सैमरी, वासिलपुर समेत बबेरू क्षेत्र के प्रभावित गांवों का सर्वे करेंगे।
बड़ी जोत के किसानों के धेला नहीं
कमासिन। बड़ी जोत वाले किसानों को पिछले वर्ष ओलावृष्टि से नुकसान के बाद धेला नहीं मिला। शासन की ओर से सिर्फ लघु व सीमांत किसानों को ही आर्थिक सहायता दी गई थी। लखनपुर ग्राम प्रधान सुमन शुक्ला ने मुख्यमंत्री समेत उच्चाधिकारियों को भेजे पत्र में कहा है कि दैवीय आपदा में छोटे व बड़े किसानों के बीच भेदभाव किया जाता है।
सबसे ज्यादा नुकसान बड़े काश्तकारों का होता है। लखनपुर व जगऊ टोला के 46 और जोरावरपुर के 30 बड़े किसान अभी तक आर्थिक मदद की उम्मीद के बाद मायूस हो गए। दोबारा फिर पूरी फसल चौपट हो गई।