नरैनी/खप्टिहकलां। दैवी आपदा से फसल गंवा देेने के बाद किसानों द्वारा की जा रही आत्महत्याओं की घटनाओं में दो और किसानों ने फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली। इनमें एक पूर्व प्रधान था। दूसरे की उम्र सिर्फ 26 वर्ष थी। उस पर बैंक का कर्ज था।
नरैनी क्षेत्र के बरसड़ा मानपुर गांव निवासी पूर्व प्रधान राजाराम यादव (45) पुत्र साधु छह बीघा जमीन के काश्तकार थे। इस बार उन्होंने खेतों में गेहूं और अरहर बोई थी। सारी फसल बारिश और ओला में चौपट हो गई। पत्नी बेलपतिया ने बताया कि मात्र 6 बीघा खेत से घर का खर्च नहीं चल पाता था।
इस पर राजाराम 4 महीने पूर्व मजदूरी के लिए दिल्ली चले गए थे, लेकिन वहां भी कुछ खास कमाई नहीं हो सकी। 15 दिन पहले दिल्ली से लौटने के बाद फसल की दुर्दशा देख वे परेशान रहने लगे। पुत्र राजेश की शादी तय हो चुकी थी। 22 अप्रैल को बारात जानी थी।
रविवार को दोपहर वे खेत पर जाने की बात कहकर घर से निकले थे। तीन बजे किसानों ने उनका शव बबूल के पेड़ से फंदे में लटकता देखा। बता दें कि बरसड़ा मानपुर गांव में फिलहाल किसानों को सरकारी मदद नहीं मिली है। खबर लिखने तक पुलिस नहीं पहुंची थी।
दूसरी घटना पैलानी थाना क्षेत्र के सिंधनकलां गांव की है। यहां श्यामकरन (26) 10 बीघा का काश्तकार थे। इस बार खेत में अरहर, चना, गेहूं बोया था। ओला और बारिश से फसल चौपट हो जाने के बाद वे परेशान रहने लगे। शनिवार को श्यामकरन मजदूरों के साथ खेत में अरहर की फसल काटते रहे।
रात में घर आकर सो गए। सुबह उनका शव मवेशी बाड़े में छप्पर से रस्सी के सहारे फंदे में झूलता मिला। सुबह फसल काटने के लिए आए मजदूरों ने शव लटकता देखा। मृतक के बड़े भाई राजकरन ने बताया कि पिता राजकिशोर की मौत 1993 में हो गई थी। दोनों भाइयों के नाम 10-10 बीघा जमीन है।
फसल में कुछ भी हाथ न आने से श्यामकरन परेशान था। उस पर इलाहाबाद यूपी ग्रामीण बैंक, पैलानी शाखा से किसान क्रेडिट कार्ड का 22 हजार रुपये कर्ज था। डेढ़ माह पहले बैंक से नोटिस भी आई थी। भाई के मुताबिक लगभग 20 हजार रुपये साहूकारों को भी देने थे।