दैवी आपदा से कंगाली की कगार पर आ गए किसानों को बेटियों की शादी टेढ़ी खीर बनी हुई है। कन्या विवाह के लिए सरकार ने भले ही कोई मदद नहीं की, पर स्वयंसेवी संगठन किसानों की मदद को आगे आ गए हैं। ऐसी ही एक बानगी 23 अप्रैल को देखने को मिलेगी। ‘अमर उजाला’ में खबर छपने के बाद दो प्रमुख स्वयंसेवी संगठनों ने किसान की बेटी को शादी में सामान मुहैया कराया है।
मामला नरैनी तहसील के पिपरा गांव का है। यहां के किसान रजोला की बेटी ललिता की शादी 23 अप्रैल को तय है। खेत में फसल के आसार उम्मीदों से भरपूर थे। रजोला का सोचना था कि फसल अच्छी हो रही है, लिहाजा कटाई के बाद बेटी की शादी धूमधाम से करेगा।
लेकिन कुदरत को यह मंजूर नहीं था। मौसम की मार ने रजोला की उम्मीदों पर पानी फेर दिया। ओला और बारिश से सारी फसल मटियामेट हो गई। ऐन मौके पर कुदरत के इस खेल से रजोला गम में डूब गया। उसने अपनी दुधारू भैंस बेंच दी। जमीन बेंचने के लिए ग्राहक की तलाश शुरू कर दी। उसकी इस परेशानी की खबर ‘अमर उजाला’ ने 17 अप्रैल को प्रमुखता से छापी।
खबर के बाद भी सरकारी और जनप्रतिनिधि नुमाइंदे नहीं पसीजे। अलबत्ता इस क्षेत्र में सक्रिय स्वयंसेवी संगठन ‘चिंगारी’ और ‘विद्याधाम समिति’ आगे आ गए। इस संगठनों ने कुछ ही दिन पहले दैवी आपदा पीड़ित किसानों के लिए इस क्षेत्र में किसान बैंक चालू किया है।
ललिता की शादी के लिए इसी बैंक से डेढ़ कुंतल गेहूं, 25 किलो चना और 25 किलो चावल के अलावा कुछ नकदी रजोला को दी है। चिंगारी संगठन के अध्यक्ष लल्लू राम कबीर ने बताया है कि रजोला जैसी परिस्थितियों से गुजर रहे किसानों की बेटियों की शादी में उनका संगठन इसी तरह की मदद करेगा। पड़ोसी गांव चंद्रपुरा, माखनपुर, शाहबाजपुर में भी किसानों को अनाज बैंक से मदद दी जाएगी।