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एक ही गांव में दो सौ प्रवासी मजदूर बेकाम

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नरैनी में महानगरों से लौटे प्रवासी मजदूर। - फोटो : BANDA
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नरैनी। महानगरों से लौटे प्रवासी मजदूरों को स्थानीय प्रशासन मनरेगा जैसी योजनाओं में एक माह बाद भी काम नहीं दे सका। उनके हाथ खाली हैं। ये लोग रोजगार की तलाश में महानगरों को गए थे। महामारी ने उन्हें वापस घर ला दिया। ऐसे में इन युवाओं को दोहरा सदमा है।
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नरैनी तहसील के नसेनी गांव में लगभग 200 युवक दिल्ली, मुंबई, सूरत आदि महानगरों से लौटकर आए हैं। इन्हें आए हुए एक माह बीत गया। यहां ढेला भर काम नहीं मिला। परिवार उनका बमुश्किल खर्च उठा रहा है। कई युवा महानगरों में कर्जदार हो गए थे। उन्हें उनका कर्ज वापस करने की भी चिंता सता रही है।
गांव के लल्लूराम पुत्र कोदू और रामस्वरूप पुत्र हनुमान ने बताया कि उन्हें मनरेगा का जॉबकार्ड दिया गया है, लेकिन काम नहीं दिया। बेरोजगार रहकर गुजारा नहीं हो सकता। उधर, महिला ग्राम प्रधान के प्रतिनिधि जमील अहमद का कहना था कि महानगरों से लौटे प्रवासी मजदूरों ने यहां काम की मांग नहीं की है। मनरेगा कार्य चल रहे हैं। जो चाहेगा उस मजदूर को काम दिया जाएगा।
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