फसल गंवाने की गम में किसानों की जान गंवाने का सिलसिला थम नहीं रहा। ताजा घटना में दो और किसानों ने जान दे दी। एक ने ट्रेन के आगे छलांग लगाई तो दूसरा पेड़ पर फांसी से झूल गया। तीनों शवों का पुलिस ने पोस्टमार्टम कराया है।
पहली घटना बांदा-कानपुर रेल मार्ग में अकोना रेलवे स्टेशन के पास हुई। मौदहा (हमीरपुर) प्रतिनिधि के मुताबिक खंडेह गांव के बैजनाथ के नाम 25 बीघे जमीन है। वह कुछ जमीन गिरवी रख दिल्ली में मजदूरी करता है। एक बेटा उसके साथ वहीं मजदूरी करता है। दूसरा बड़ा लड़का गजोधर (42) यहां खेती करता था। भाई राकेश ने बताया कि गजोधर सुबह बिना बताए घर से निकल गया, फिर वापस नहीं आया।
कुछ देर बाद उसका शव रेलवे ट्रैक पर पड़े होने की सूचना मिली। बारिश और ओलावृष्टि से फसल पूरी तरह बर्बाद होने से आर्थिक तंगी हो गई थी। एक लाख रुपये साहूकारों का कर्ज भी था। इसी से परेशान होकर उसने खुदकुशी कर ली। वहीं ग्राम प्रधान बरातीलाल यादव ने बताया कि गजोधर ने 10 बीघे में चना व कुछ में गेहूं बोया था। घर में पत्नी के अलावा पांच बच्चे हैं।
सूचना पाकर जीआरपी बांदा पुलिस शव को पोस्टमार्टम के लिए ले गई। पत्नी से इस घटना के संबंध में जानकारी चाही गई तो वह सिर्फ इतना कह पाई कि अब क्या होगा। फसल भी गई, कमाने वाला भी गया।
उधर, दूसरी घटना में बांदा के पैलानी तहसील के सांड़ी गांव में शनिवार की रात करीब 9 बजे किसान श्रीपाल निषाद (50) पुत्र परसदवा घर में किसी को कुछ बताए बगैर चुपचाप घर से निकल गया। रविवार को दोपहर उसका शव गांव के बाहर पेड़ में फांसी पर लटकता मिला।
समाजसेवी ऊषा निषाद ग्राम वासियों के साथ घटनास्थल पहुंची और एसडीएम व पैलानी थाने को सूचना दी। एसडीएम कहीं बाहर होने से मौके पर नहीं पहुंच सके। शाम को लेखपाल और कानूनगो ने मौके पर आकर जांच-पड़ताल की। घर वालों ने बताया कि लड़की की शादी और खेती के लिए गांव के लोगों से करीब एक लाख रुपये कर्ज ले रखा था।