बांदा। पूर्व सैनिक जिस समय कारगिल विजय दिवस की सालगिरह की खुशियां मना रहे थे, उसी समय यहां के दो पूर्व सैनिकों के घरों में मातम छा गया। दोनों के जवान बेटों की महोबा में हुई कार दुर्घटना में मौत हो गई। रविवार को दोनों युवकों के साथ हादसे का शिकार हुए तीसरे युवक का शव भी महोबा से दोपहर बाद यहां लाया गया।
सैनिकों के बेटों का दाह संस्कार और तीसरे मृतक के शव को दफनाया गया। वह मुस्लिम था। तीनों ही घरों में शनिवार से ही लोगों के आने-जाने और शोक संवेदना जताने का तांता लगा रहा। साप्ताहिक बंदी/लॉकडाउन के बावजूद बड़ी संख्या में लोग इनके अंतिम संस्कारों में शरीक हुए।
हादसे का शिकार हुए शहर के कैलाशपुरी निवासी अमित दीक्षित (28) के पिता सुंदरलाल उड़ीसा गार्ड रेजीमेंट में हवलदार थे। वर्ष 2004 में रिटायर हो गए। अमित की शादी इसी वर्ष 4 फरवरी को रिसौरा (नरैनी) गांव में हुई थी। वह स्नातक था।
एमए की तैयारी कर रहा था। दूसरे मृतक सिंहवाहिनी (कटरा) निवासी विपिन दुबे के पिता सुरेंद्र चंद्र दुबे सेना में लखनऊ कैंट में तैनात थे। इसी वर्ष जनवरी में रिटायर हुए हैं। बेटा विपिन बांदा की गैस एजेंसी में कंप्यूटर ऑपरेटर था। पांच वर्ष पूर्व शादी हुई थी, लेकिन संतान नहीं हुई। अब उसकी पत्नी गर्भवती है। विपिन अपनी संतान का मुंह नहीं देख पाया।
तीसरा मृतक हाथी खाना (अलीगंज) निवासी जियाउल कुरैशी (36) बांदा शहर का मशहूर बाइक मैकेनिक था। 15 माह पहले ही कानपुर में शादी हुई थी। शहर के डिग्गी चौराहा में बाइक रिपेयरिंग और पार्ट्स की दुकान है। घर का कमाऊ बेटा था। मां की तीन साल पहले मौत हो चुकी है। पिता नूरुल भी बाइक मैकेनिक है।