बांदा। अनलॉक-1 के पहले चरण में सोमवार (8 जून) से ढाई माह बाद मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारा और गिरजाघर के ‘लॉक’ खुल गए। पहले ही दिन मंदिरों में भक्तों की भारी भीड़ रही। हालांकि शासन द्वारा जारी एडवायजरी के तहत श्रद्धालुओं को आपसी दूरी के साथ धार्मिक स्थलों में प्रवेश और पूजा-अर्चना की अनुमति दी गई।
बगैर मॉस्क वालों को प्रवेश की इजाजत नहीं दी गई, लेकिन किसी भी धार्मिक स्थल पर सैनिटाइजेशन और थर्मल स्क्रीनिंग आदि व्यवस्था नहीं रही। हालांकि नए नियमों के साथ धार्मिक स्थलों को खोलने से धर्म स्थल प्रमुख नाखुश हैं। सोमवार को पहले धार्मिक स्थलों का कुछ यूं रहा नजारा।
1. बांबेश्वर मंदिर (कैलाशपुरी) : मंदिर के घंटे हटा दिए गए। गुफा में विराजमान शिवलिंग में बैरीकेडिंग की गई थी, जिससे श्रद्धालु शिवलिंग को छू न सकें और न ही जलाभिषेक और प्रसाद चढ़ा सकें। भक्तों की ओर से पुजारी ही जल-प्रसाद और पुष्प आदि चढ़ाते रहे। मुख्य मंदिर के बाहर आरती करने की अनुमति थी। एडवायजरी के मुताबिक व्यवस्थाओं की निगरानी के लिए सीसी कैमरे चालू हैं।
2. महेश्वरी देवी/काली देवी मंदिर : दोनों शहर के मशहूर देवी मंदिर हैं। महेश्वरी देवी मंदिर में मूर्ति से 6 फीट दूर बैरीकेडिंग की गई थी। नारियल, चुनरी, माला-फूल आदि चढ़ाने पर रोक रही। प्रत्येक व्यक्ति मॉस्क लगाकर ही मंदिर आए। बिना मॉस्क वालों को मुख्य द्वार से ही दर्शन के बाद लौटा दिया जाता रहा। कमोवेश यही स्थिति काली देवी मंदिर (अलीगंज), सिंह वाहिनी मंदिर (कटरा) में भी रही।
3. नवाबी जामा मस्जिद : लॉकडाउन की तरह सोमवार को भी मुख्य द्वार बंद रहा। छोटे गेट से ही गिने-चुने लोग अंदर आते-जाते रहे। नमाज आदि के लिए पांच से ज्यादा लोगों को अनुमति नहीं दी गई। हालांकि यहां मस्जिद स्टाफ ही पूरे समय मौजूद रहा। बाहरी व्यक्ति नहीं पहुंचे। कमोवेश यही स्थिति शहर की शेख सरवर साहब की मस्जिद (कोतवाली रोड) सहित विभिन्न मस्जिदों में भी रही।
4. गुरुद्वारा (पीली कोठी) : सोमवार को सुबह यहां आए भक्तों को सीधे प्रवेश नहीं दिया गया। हाथ-पैर धोने और मॉस्क लगाने के बाद ही गुरुद्वारा के अंदर जाने दिया गया। हालांकि पहले दिन गिने-चुने लोग ही पहुंचे। ग्रंथ आदि को श्रद्धालुओं को छूने नहीं दिया जा रहा है। ग्रंथी अमरलाल आपसी दूरी बनाए रखने का लगातार एनाउंस करते रहे। यहां भी एडवायजरी का पूरी तरह पालन होता रहा।
5. सेंट पॉल्स चर्च (रोडवेज के पास) और पीला चर्च (चिल्ला रोड) : गिरजाघरों में भी शर्तों का पालन नजर आया। सुबह साढ़े सात बजे पादरी एल्बर्ट रसकिन और एल्फ्रेड रसकिन समेत पांच लोग ही सोशल डिस्टेंसिंग के बीच प्रार्थना सभा में शामिल हुए। किसी भी अनुयायी को गिरिजाघर को कोई भी वस्तु न छूने की नसीहत दी जाती रही। यहां शासन की गाइड लाइन का पूरी तरह पालन हुआ।
शर्तों का पालन कराने में आ गए पसीने
कोरोना का खतरा अभी टला नहीं है। एक समय में चार से पांच श्रद्धालुओं को ही मंदिर में प्रवेश और पूजन की अनुमति रहेगी। सैनिटाइजर से हाथ धुलवाने के बाद ही प्रवेश दिया जाएगा। यह भी कहा कि मंदिर खुलने से कोई लाभ नहीं है, बल्कि नियमों से पुजारियों के लिए और मुश्किलें बढ़ गईं। पहले दिन ही शर्तों का पालन कराने में पसीने आ गए। -रवि उर्फ दप्पू सैनी, पुजारी महेश्वरी देवी मंदिर, बांदा।
सिर ढकने को भक्त खुद का रुमाल लाएं
प्रदेश सरकार के दिशा-निर्देश का गुरुद्वारा परिसर में शत-प्रतिशत पालन होगा। प्रत्येक व्यक्ति के हाथ-पैर धुलवाने के बाद प्रवेश दिया जाएगा। सामाजिक दूरी का पालन सुनिश्चित कराया जाएगा। ग्रंथ आदि छूने पर रोक है। हरेक भक्त को सिर ढकने के लिए खुद का रुमाल लाने को कहा गया है। उन्हें अन्य नियमों की भी जानकारी दी जा रही है।-अमरलाल, मुख्य ग्रंथी गुरुद्वारा (पीली कोठी)।
नवाबी जामा मस्जिद का बंद मुख्य द्वार।- फोटो : BANDA