बांदा। ब्लैक फंगस (म्यूकोरमाईकोसिस) के बढ़ते खौफ के बीच बुंदेलखंड में भी कुछ लक्षणयुक्त मरीज पाए गए हैं। यहां के स्वास्थ्य विभाग ने दावा किया है कि चित्रकूटधाम मंडल में इसके इलाज की पर्याप्त व्यवस्था है। यह भी कहा है कि इसके इंजेक्शन और दवाओं की मांग भेजी गई है।
बुंदेलखंड के झांसी और चित्रकूटधाम मंडल में हमीरपुर में ब्लैक फंगस के संभावित इक्का-दुक्का मरीज मिले हैं। हमीरपुर में वृद्ध में लक्षण के मद्देनजर उसे झांसी मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया है।
चित्रकूटधाम मंडल के अपर स्वास्थ्य निदेशक डॉ. आरबी गौतम ने बताया कि ब्लैक फंगस का खतरा उन पर ज्यादा रहता है जिनमें प्रतिरोधक क्षमता बहुत कम होती है। कोरोना संक्रमण या इससे स्वस्थ हुए व्यक्ति का इम्युनिटी सिस्टम काफी कमजोर होता है। ऐसे लोगों को ब्लैक फंगस का ज्यादा खतरा रहता है।
राजकीय मेडिकल कॉलेज प्रधानाचार्य डॉ. मुकेश कुमार यादव ने बताया कि जिन कोरोना मरीजों को डायबिटीज है उन्हें शुगर लेबल बढ़ जाने पर ब्लैक फंगस का ज्यादा खतरा रहता है। इसका संक्रमण सांस के साथ नाक के अंदर चला जाता है। प्रधानाचार्य ने दावा किया कि यहां मेडिकल कॉलेज में इस रोग के इलाज की बेहतर सुविधा है।
ब्लैक फंगस के लक्षण व बचाव
नाक में दर्द, सूजन, खून या नाक का बंद होना, दांत या जबड़े में दर्द, धुंधला नजर आना, बुखार, सीने में दर्द , सिर दर्द, खांसी, सांस लेने में दिक्कत, खून की उल्टी और कभी-कभी मस्तिष्क पर भी असर हो सकता है। बचाव में बताया गया कि निर्माणाधीन इलाकाें में जाने पर मास्क पहनना, बाग-बगीचे में जाने पर फुल अस्तीन शर्ट-पैंट, ग्लब्स और ब्लड ग्लूकोज स्तर की नियमित जांच।