फोटो - 13 कमल बाबू बाजपेयी। फाइल फोटो
बांदा। रेलवे लाइन के दोहरीकरण कार्य के दौरान खैरार जंक्शन पर ड्यूटी कर रहे एक लोको पायलट की तबीयत अचानक बिगड़ने के बाद मौत हो गई। घटना के बाद रेलवे कर्मचारियों की सुरक्षा व्यवस्था और आपातकालीन चिकित्सा सुविधाओं को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। परिजन का आरोप है कि समय रहते पर्याप्त संसाधन और चिकित्सा सहायता उपलब्ध होती तो शायद उनकी जान बचाई जा सकती थी।
शहर कोतवाली क्षेत्र के अतर्रा चुंगी स्थित कच्चा तालाब निवासी 45 वर्षीय कमल बाबू बाजपेयी रेलवे में लोको पायलट के पद पर कार्यरत थे। इन दिनों खैरार जंक्शन के पास चल रहे रेलवे लाइन दोहरीकरण परियोजना में उनकी ड्यूटी टावर वैगन संचालन में लगाई गई थी। मंगलवार सुबह ड्यूटी के दौरान अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई और वह बेहोश होकर गिर पड़े। मौके पर मौजूद साथी कर्मचारियों और इंजीनियरों ने तत्काल उन्हें निजी कार से जिला अस्पताल पहुंचाया, जहां चिकित्सकों ने उपचार शुरू किया। हालांकि हालत गंभीर होने के कारण उन्हें बचाया नहीं जा सका और उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई।
रिश्तेदार राहुल तिवारी ने बताया कि चिकित्सकों ने प्रारंभिक तौर पर अधिक गर्मी और लू के प्रभाव को मौत संभावित कारण बताया है। हालांकि वास्तविक कारण पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।घटना के बाद मृतक की पत्नी उमा का रो-रोकर बुरा हाल है। परिवार में एक पुत्र और एक पुत्री हैं। पत्नी का आरोप है कि भीषण गर्मी में कार्य कर रहे कर्मचारियों के लिए पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम, शीतल पेयजल, प्राथमिक उपचार और आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था उपलब्ध नहीं थी।
कोतवाली प्रभारी बलराम सिंह ने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद मौत के कारणों की पुष्टि हो सकेगी। वहीं तहरीर मिलने पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।