इस संसार में बुराई के दो रूप होते हैं। एक असली और दूसरा नकली। असली बुराई की परख बाद में होती है। ये बातें भागवताचार्य पंडित रामबाबू वाजपेयी ने शिशु मंदिर, गूलरनाका में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में कहीं। कथा व्यास ने श्रीकृष्ण जन्म का वृत्तांत सुनाते हुए कहा कि कंस एक सामाजिक बुराई है। बुराई के हमेशा दो रूप होते हैं।
एक असली और दूसरा नकली। कंस जिस समय देवकी वसुदेव का रथ हांकने लगा तो भगवान ने आकाशवाणी के जरिए देवकी व वसुदेव को सचेत किया कि जो कंस तुम्हारी दृष्टि में सुधरा हुआ दिखाई दे रहा है वह बुराई का नकली रूप है। जब वही कंस देवकी के केश पकड़ कर रथ से घसीटने लगा और मारने के लिए उठा तो यह बुराई का दूसरा स्वरूप है।
आयोजक बाला प्रसाद शुक्ल ने व्यास पीठ की आरती उतारी और भक्तों में प्रसाद वितरित किया। उधर, दुरेड़ी में चल रही संगीतमय भागवत कथा में आचार्य यज्ञेश मिश्र ने ‘परहित सरिस धर्म नहि भाई’ प्रसंग पर कहा कि जो दूसरों को सुख देने में ही पूरा जीवन लगा देता है, वही धरती का भगवान है।
अपने बेटे-बेटियों को पालना-पोसना ही जीवन नहीं है। यह कार्य तो पशु-पक्षी भी कर लेते हैं। आरती में यजमान मइयादीन तिवारी, वीरेंद्र सिंह, ज्योतिषाचार्य डा.नरेंद्र दीक्षित, जयराम सिंह मौजूद रहे।