बांदा। कृषि विश्वविद्यालय में 26 फरवरी से आयोजित होने वाले तीन दिवसीय उत्तर क्षेत्रीय किसान मेला में सात राज्यों के किसान व कृषि वैज्ञानिक शिरकत करेंगे। किसानों की आय बढ़ाने के तरीकों पर संवाद होगा। मेले की सभी तैयारियां पूरी कर ली गई है। मेले का शुभारंभ प्रदेश के कृषि, कृषि शिक्षा एवं अनुसंधान मंत्री सूर्य प्रताप शाही व गोसेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता करेंगे।
विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. एसवीएस राजू ने बताया कि कृषि मंत्री की कृषि एवं कृषि शिक्षा के विकास में सहायक तीन महत्वपूर्ण परियोजनाओं का लोकार्पण करेंगे। बताया कि मेले में उन्नत किस्म के बीज, खाद, कृषि रसायन, कृषि उपकरण, पशु आहार सहित अन्य उपयोगी कृषि सामग्री उपलब्ध रहेंगी। मिलेट्स से बने मूल्य संवर्धित उत्पाद, पारंपरिक हस्तशिल्प व छात्र-छात्राओं द्वारा तैयार संजीव मॉडल भी प्रदर्शित किया जाएगें। विश्वविद्यालय के सभी महाविद्यालयों, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के विभिन्न राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय महत्व के शोध संस्थानों, शासकीय व गैर शासकीय (कृषि निवेशकर्ताओं, उत्पादकों व विक्रेताओं) के साथ ही एफपीओ एवं स्वयं सहायता समूहों के 150 से अधिक स्टॉल लगाए जा रहे हैं। इसके अलावा गो-आधारित प्राकृतिक खेती, किसानों की आय बढ़ाने के तरीकों पर किसान वैज्ञानिकों से संवाद करेंगे।
प्रगतिशील किसानों के लिए फसल, फल-फूल, सब्जी व पशु प्रतियोगिताओं का निशुल्क आयोजन 27 फरवरी को किया जाएगा।संयुक्त निदेशक डा. एलबीएस यादव ने कृषि क्षेत्र में कार्य कर रहे सभी आदान निर्माताओं व विक्रेताओं के स्टाल लगाने के आदेश दिए है। ताकि अधिक से अधिक किसानों को उन्नत तकनीक की जानकारी एक ही स्थान पर मिल सके। डा. धीरज मिश्रा ने बताया कि विश्वविद्यालय किसान मेला तैयारियों को वृहद स्तर पर मूर्त रूप दिया जा रहा है। यह मेला सात राज्यों के किसानों का महाकुंभ होगा। किसान मेले में उन्नत तकनीक से खेती करने के तरीकों की जानकारी प्राप्त कर आमदनी को बढ़ा सकते है। साथ ही वह परंपरागत खेती व मिलेट्स आदि के बारे में कृषि वैज्ञानिकों से संवाद कर अपनी समस्याओं का निराकरण कर सकते है।