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इन पर करें नजरें इनायत सरकार

Fri, 30 Oct 2015 11:16 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, बांदा
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बांदा। बुंदेलखंडियों को सपा से अपनी वफा का सिला चाहिए। सात विधायक और सात लाख वोट देने के बाद भी सपा सरकार में बुंदेलखंड में आज तक लालबत्ती नहीं चमकी। अब तक अखिलेश सरकार में छह बार मंत्रिमंडल का विस्तार हो चुका है। हर बार बुंदेलखंड को मायूसी मिली। यह कोई नहीं समझ पा रहा कि जिस बुंदेलखंड में बसपा सरकार में तीन दर्जन लालबत्तियां थीं वही सपा सरकार में उसके साथ उसकी बेरुखी की वजह क्या है?
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प्रदेश मंत्रिमंडल से आठ मंत्रियों को बर्खास्त करने और कई मंत्रियों के विभाग छीनने के बाद शनिवार को शायद अखिलेश मंत्रिमंडल का फिर विस्तार या पुनर्गठन हो रहा है। पिछले छह बार से मायूसी झेल रहे बुंदेलखंड को एक बार फिर उम्मीद जागी है। पिछले विधानसभा चुनाव में बुंदेलखंड मेें सपा के पांच विधायक जीते थे।

 इन्हें साढ़े तीन लाख से ज्यादा वोट मिले थे। इसके अलावा छह सीटों पर सपा दूसरे नंबर पर रही। यहां 2,93,394 वोट मिले। इस पर भी मंत्रिमंडल में बुंदेलखंड का सफाया रहा। पिछले वर्ष सितंबर में हुए उप चुनावों में बुंदेलखंड में सपा से वफा और जताते हुए भाजपा से दो सीटें छीनकर सपा की झोली मेें डाल दीं। हमीरपुर में सपा विधायक साध्वी ज्योति निरंजन के सांसद बनने से रिक्त हुई सीट पर सपा के शिवचरन प्रजापति रिकार्ड मतों से जीते।
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उन्हें 1,12,995 वोट मिले। इसी तरह चरखारी में उमा भारती के सांसद बनने से रिक्त हुई सीट पर सपा की उर्मिला राजपूत को सफलता मिली। अब मौजूदा समय में बुंदेलखंड से सपा के सात विधायक हो गए हैं। सातों को कुल 4,08,505 वोट मिले हैं। इसके अलावा जिन पांच सीटों पर सपा दूसरे नंबर (रनर) रही वहां 2,93,394 वोट मिले। यानी बुंदेलखंड से सपा को कुल 7,01,899 वोट मिले हैं। अब हो रहे विस्तार में भी अगर बुंदेलखंड को मंत्रिमंडल में स्थान नहीं मिलता तो शायद वर्ष 2017 मेें यह सात विधायक और सात लाख वोट सपा की झोली में दोबारा मुश्किल होंगे।
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