करतल (बांदा)। मध्यप्रदेश के पन्ना टाइगर रिजर्व के कोर एरिया से सटे राजस्व क्षेत्र में रविवार सुबह भैंस चराने जंगल जा रहे वृद्ध पर बाघ ने हमला कर दिया। हमले में जरधोवा गांव निवासी मलखान सिंह राजगौड़ के चेहरे, पीठ और घुटने पर गंभीर चोटें आईं।
हादसे में साथी ग्रामीणों ने साहस दिखाते हुए बाघ पर पत्थर फेंके, जिससे वह भाग गया। घायल को डायल 112 वाहन की मदद से पन्ना स्थित अस्पताल पहुंचाया गया। घटना के करीब दो घंटे बाद तक वन विभाग के कर्मचारी मौके पर न पहुंचने से ग्रामीणों ने नाराजगी जताई।
घायल के पुत्र देवी सिंह ने बताया कि वन्यजीवों के हमले की यह पहली घटना नहीं है। इससे पहले भी कई बार ऐसी घटनाएं हो चुकी हैं। उन्होंने कहा कि हमले के बाद करीब दो घंटे तक उनके पिता घायल अवस्था में पड़े रहे, लेकिन वन अमला मौके पर नहीं पहुंचा। ऐसे में ग्रामीणों को डायल 112 की मदद लेनी पड़ी।
पन्ना टाइगर रिजर्व के डिप्टी डायरेक्टर वीरेंद्र कुमार पटेल ने बताया कि घटना की सूचना मिलते ही टीम को रवाना कर दिया गया था। घायल वृद्ध की स्थिति अब स्थिर है। वन विभाग की ओर से तत्काल सहायता के रूप में दो हजार रुपये दिए गए हैं। उनका पूरा इलाज का खर्च उठाने का आश्वासन भी दिया गया है। बाघ को जंगल में खदेड़ने के लिए हाथियों की टीम मौके पर भेजी गई है।
डिप्टी डायरेक्टर ने बताया कि टाइगर रिजर्व के कोर एरिया से राजस्व क्षेत्र लगा हुआ है। यहां बाघों का विचरण रहता है, इससे चरवाहों और किसानों का जंगली जानवरों से आमना-सामना हो जाता है। वन विभाग की ओर से ऐसी व्यवस्थाएं की जा रही हैं, जिससे वन्यजीवों और ग्रामीणों के बीच टकराव न हो।
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एक दिन पहले भी गांव के आसपास घूम रहा था बाघ, ग्रामीणों ने बनाया था वीडियो
ग्रामीणों का आरोप है कि हमले से एक दिन पहले भी यही बाघ जरधोवा गांव के आसपास घूम रहा था। कुछ लोगों ने उसे देखा था और वीडियो भी बनाए थे।
इसकी सूचना वन विभाग को देने के बावजूद टीम मौके पर नहीं पहुंची। ग्रामीणों का कहना है कि समय रहते वन विभाग सक्रिय होता तो इस घटना को रोकने के प्रयास किए जा सकते थे।
बाघ के गांव के आसपास घूमने और फिर वृद्ध पर हमला करने की घटना से ग्रामीणों में दहशत है। उन्होंने वन विभाग पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए नाराजगी जताई।
फोटो-5-घायल वृद्ध मलखान सिंह। संवाद