बांदा। केन, यमुना, बागै और चंद्रावल सहित अन्य नदियों के उफनाने से हालात खराब हो गए हैं। पैलानी, कमासिन और जसपुरा क्षेत्र के करीब 20 गांव पानी से घिर गए हैं। सिमरनडेरा, शंकर पुरवा, तारा गांव पूरी तरह बाढ़ में समा गए हैं। यहां के करीब 100 परिवारों ने घर छोड़कर ऊंचे टीले पर आसमान के नीचे डेरा डाल दिया है। प्रशासन की तरफ से इन लोगों तक न तो राशन किट पहुंची और न ही जरूरी सामग्री। 60 से ज्यादा गांवों में रपटों के ऊपर दस फीट से ऊपर पानी बह रहा है। इससे इन गांवों के लोगों का संपर्क दूसरी जगह से कट गया है। गंभीर बीमारी से पीड़ित लोग दवाएं न मिलने से परेशान हैं।
मध्य प्रदेश में कई दिनों से हो रही तेज बारिश के चलते यमुना और केन नदी, चंद्रावल नदी उफान पर हैं। शनिवार को चिल्ला में यमुना नदी शाम चार बजे 102.75 मीटर पहुंच गई। खतरे के निशान से ढाई मीटर ऊपर पानी पहुंचने से ग्रामीण परेशान हैं। केन नदी के भी चेतावनी बिंदु के पास 102.44 मीटर पर पहुंचने से पैलानी व सदर क्षेत्र के कई गांव प्रभावित हैं। मैदानी इलाके जलमग्न हो रहे हैं। किसानों की करीब 10 हजार बीघे फसल डूब गई है।
पीड़ित बोले-लेखपाल करते औपचारिकता, प्रशासन से नहीं मिली मदद
पैलानी। चिल्ला थाना क्षेत्र के लौमर व तारा गांव में यमुना का पानी पहुंच गया है। गांव के मनोहर निषाद की पत्नी भूरी ने बताया कि बाढ़ ने आशियाना छीन लिया है। तंबू लगाकर ऊंचाई पर डेरा डाला है। मवेशी भी साथ लाए हैं। दो दिनों से खाना नहीं खाया। लेखपाल औपचारिकता कर चले जाते हैं। प्रशासन से अभी मदद नहीं मिली है।
छोटे निषाद व भूखन निषाद, प्रेमचंद साहू, रज्जू साहू, बिंदा निषाद, रामनरेश निषाद, रामकुमार वर्मा के मकान यमुना नदी की बाढ़ में जलमग्न हो गए हैं। बताया कि जीने का सहारा बची फसलें भी बाढ़ के पानी में डूब चुकी हैं। खप्टिहा कलांं के सिमरन डेरा निवासी बाबूलाल निषाद, चुन्नू निषाद, समर निषाद के घरों में केन नदी की बाढ़ का पानी घुस गया है। यहां के लोग बाढ़ की प्रलय के चलते अपने-अपने मकान के छतों पर धीरे-धीरे करके अपना सामान चढ़ा रहे हैं। कुछ लोग घर गृहस्थी का सामान लेकर ऊंचे टीलों में जा रहे हैं। केन के पानी से नांदादेव-पडोहरा मार्ग, बारा-गलौली मार्ग, सिंधनकला -तुर्री रपटा मार्ग, नरी से पलरा मार्ग , पैलानी-चंदवारा मार्ग, अभी भी बाढ़ के पानी से जलमग्न हैं। पैलानी-मरझा मार्ग में सभी जगह नाव संचालित हैं। ओवरलोडिंग तथा नदी किनारे बच्चों को जाने से रोका जा रहा है। पैलानी के शंकर पुरवा गांव में 62 लोगों का परिवार है, जिसमें से 30 परिवारों के घर डूबे हैं। शेष परिवारों के लोग हैं, वह ऊंचे टीले पर तंबू लगाकर बसर कर रहे हैं। पैलानी क्षेत्र के 47 गांव के मजरों की बिजली कई दिनों से बंद होने की वजह से इन मजरों मे बसे पीड़ितों का हाल-चाल ले पाना भी मुश्किल हो गया है।
रपटा डूबा, कई गांवों का संपर्क टूटा
नरैनी। कुरुहूं गांव में बने रपटा के ऊपर केन नदी का पानी पहुंच गया है। इससे कुरुहूं, राजादाढ़ी व मवासी का पुरवा सहित कई गांवों का आवागमन ठप हो गया है। गांव के लोग प्रतिदिन अपनी जान जोखिम में डालकर रपटा पार कर रहे हैं। नाव की सुविधा न होने की वजह से लोगों को भारी मुसीबतों का सामना करना पड़ता है। गांव के कुलदीप त्रिपाठी, विवेक त्रिपाठी, छोटा द्विवेदी, राजेश यादव, अशोक ठाकुर, कृपाल नाई, गया खंगार, रामलाल मवासी आदि ने बताया कि तहसील दिवस में कई बार प्रार्थना पत्र देकर पुल बनवाए जाने की मांग की गई, किसी ने भी ध्यान नहीं दिया।
पानी भरने से दो हाईवे पर आवागमन बंद
तिंदवारी। यमुना नदी की बाढ़ ने तटवर्ती गांवों के लोगों की नींद उड़ा दी है। बांदा-बहराइच राजमार्ग, कमासिन-राजापुर राजमार्ग बंद है। तिंदवारी-बबेरू संपर्क मार्ग पर सिमौनी गांव रपटा के ऊपर से पानी बहने लगा है, जिससे शनिवार से राहगीरों का आवागमन बंद हो गया है। जौहरपुर संपर्क मार्ग के पर ऊपर पानी आ जाने से आवागमन पूरी तरह से ठप है।
बेंदाघाट स्थित काली देवी मंदिर में यमुना का पानी भर गया है। बेंदा खास गांव के कंपोजिट विद्यालय में पानी भरने से शिक्षण कार्य बाधित है। बेंदा घाट में लगातार यमुना के पानी तेजी के साथ बढ़ रहा है। नायब तहसीलदार धनंजय सिंह व थाना प्रभारी सुरेश कुमार सैनी ने क्षेत्र का भ्रमण कर बाढ़ का जायजा लिया। ग्राम प्रधान देशराज सिंह ने बताया कि 2013 में भी ऐसी बाढ़ की स्थिति आई थी। अमलीकौर, मचाहार, लोहरी, बेंदाघाट में बाढ़ का पानी लोगों के घरों में घुस गया है।
पुल में भारी वाहनों के आवागमन पर लगी रोक
बबेरू। क्षेत्र के औगासी पुल में बाढ़ देखने के लिए लोगों की भीड़ उमड़ रही है। बाढ़ अधिक होने पर यहां से भारी वाहनों के आवागमन पर रोक लगा दी गई है। मझीवां, केवटरा, बदौली, बघैला, सिमौनी, टोलाकला, समगरा, जलालपुर, बाकल, मरका, बैरफ, उसरा और कमासिन क्षेत्र के चरका, मुड़वारा, मटेहना गांव में पानी पहुंच गया है। रपटे के ऊपर पानी आने से लोग घरों में कैद हैं। कई गांवों का संपर्क टूट गया है। ग्रामीणों के आने-जाने के लिए नाव तक की व्यवस्था नहीं की गई है।
दहा, इटर्रा व लखनपुर गांव जलमग्न, ऊंचे स्थानों पर पहुंचाया
कमासिन। क्षेत्र में यमुना की बाढ़ के कारण उससे जुड़ी बागै व रवाय नदी भी उफान पर हैं। कई गांव बाढ़ के पानी से घिर गए हैं। खरीफ की खड़ी फसलें जलमग्न हो गई हैं। कमासिन-राजापुर मार्ग में बाढ़ का पानी आ जाने के कारण इसे बंद कर दिया गया है। नाव के सहारे लोग आवागमन कर रहे हैं।रवाय नदी में पानी बढ़ने से रपटा डूब गया है। दहा गांव का संपर्क कट गया है। गांव के निचले इलाके में बसे कई मकानों के अंदर पानी घुस गया है। राजस्व टीम इन्हें सुरक्षित ऊंचे स्थान पर सामान सहित पहुंचा रही है। बागै नदी के बाढ़ का पानी इटर्रा गांव जाने के लिए बनी पक्की सड़क के ऊपर आ जान से रपटा पूरी तरह डूब गया है। यहां भी नाव से आवागमन हो रहा है। यमुना नदी की बाढ़ से लखनपुर गांव जलमग्न हो गया है। पूरी फसलें जलमग्न हो गई हैं। जल जीवन मिशन योजना के तहत खटान गांव में बनाए गए इंटेकबेल में भी पानी भर गया है। एसडीएम बबेरू रजत वर्मा ने बताया कि बाढ़ प्रभावित गांवों में कानूनगो, लेखपाल तथा कुछ जगह पुलिस बल को भी लगाया गया है। बचाव और राहत कार्य जारी है।
राहत व बचाव कार्य कराए प्रशासन
बांदा। सपा राष्ट्रीय महासचिव विशंभर प्रसाद निषाद और किसान नेता पुष्पेंद्र चुनाले ने जिला प्रशासन से बाढ़ पीड़ितों की मदद करने व राहत कार्य कराने की मांग की है। कहा कि शंकर पुरवा के बाढ़ पीड़ित 100 परिवार खुले आसमान में डेरा डाले हैं। प्रशासन की ओर से अभी तक कोई मदद नहीं पहुंची है। राशन किट न मिलने से बच्चे व महिलाएं दो दिन से भूखों मर रहे हैं।
डीएम व मंडलायुक्त ने बाढ़ प्रभावित गांवों की देखी स्थिति
बांदा। मंडलायुक्त अजीत कुमार ने शनिवार को दोपहर अधिकारियों के साथ पैलानी क्षेत्र में बाढ़ का जायजा लिया और पीड़ितों से बातचीत की। यब तहसीलदार ने बताया कि पैलानी के सिंधनकला, लसड़ा, बसधरी, अदरी, रेंहुटा, नरी, अमचौली, शंकरपुरवा मजरा नांदादेव, नरायढ़, चिल्ला, तारा, खजुरी, लौमर, भवानीपुर, महबरा, चंदवारा, खप्टिहा कला, गौरी खुर्द, बरेहटा तथा पैलानी (आंशिक) बाढ़ से प्रभावित हैं। उन्होंने डीएम से तत्काल बाढ़ पीड़ितों को मदद पहुंचाने के निर्देश दिए हैं। जिलाधिकारी जे. रीभा व पुलिस अधीक्षक पलाश बंसल ने भी बबेरू के बाढ़ ग्रस्त क्षेत्र का निरीक्षण किया।