बांदा। तीन करोड़ रुपये वेतन में खर्च होने के बाद भी गांवों की सफाई व्यवस्था बेपटरी हो गई है। हालत यह है कि गांव में 800 सफाई कर्मचारी तैनात है, लेकिन एक चौथाई जिला, तहसील व ब्लाॅक मुख्यालयों में रहते हैं। इससे गांवों की गंदगी दूर नहीं हो पा रही है।
सरकार गांवों को साफ स्वच्छ रखने के लिए स्वच्छ भारत मिशन के तहत लाखों रुपये पानी की तरह बहा रही है। आंकड़ों की मानें तो बसपा सरकार में नियुक्ति किए गए 771 स्थाई और 24 अस्थाई कर्मचारी सफाई के लिए गांवों में तैनात हैं, लेकिन अफसरों की लापरवाही से एक चौथाई कर्मचारी जिला मुख्यालय के विकास भवन, जिलाधिकारी कार्यालय, डीपीआरओ कार्यालय सहित तहसील व ब्लाक मुख्यालयों से संबद्ध है। पिछले वर्ष तत्कालीन जिलाधिकारी दुर्गा शक्ति नागपाल ने डीपीआरओ को आदेश दिए थे कि मुख्यालयों में तैनात सफाई कमियों की संबद्धता समाप्त की जाए। डीपीआरओ ने संबद्धता समाप्त करने का आदेश तो जारी कर दिया, लेकिन कोई भी कर्मचारी मूल तैनाती स्थान पर नहीं गया।