तालाब में घटनास्थल पर बच्चों के शवों के पास परिजन व अन्य लोगों की भीड़।
- फोटो : अमर उजाला
बांदा। महबुलिया विसर्जन में तीन बच्चों की जल समाधि हो गई। एक बालिका का शव तो कुछ घंटे बाद ही बरामद हो गया और दो बालक दूसरे दिन सुबह तालाब के पानी के ऊपर पाए गए। यह दोनों रिश्ते में ममेरे व फुफेरे भाई हैं। बालिका की उम्र 13 वर्ष और बालकों की उम्र आठ व सात वर्ष है। एक साथ तीन मौतों से मृतकों के पड़ोस में शोक छा गया। पुलिस ने शवों का पंचनामा कराया है।
सोमवार को महबुलिया पर्व था। अलीगंज रामलीला मैदान के पास की कुछ बालिकाएं कांटों की झाड़ में फूल सजाकर महबुलिया विसर्जित करने कुछ दूर स्थित बाबू साहब तालाब गईं थीं। सूर्यास्त का समय था। 13 वर्षीय बालिका कुसुम पुत्री रामसिया कुशवाहा महबुलिया विसर्जित करने के दौरान पैर फिसलने से तालाब के गहरे पानी में समा गई। अन्य सहेलियों ने शोर मचाया तो आसपास के लोगों ने उसे पानी से ढूंढ निकाला। उसकी मौत हो चुकी थी।
उधर, मंगलवार को तड़के आसपास के लोग बाबू साहब तालाब की तरफ मार्निंग वाक को गए तो तालाब के घाट के पास दो बच्चों के शव पानी में पड़े देखे। इनमें एक आठ वर्षीय लखन पुत्र राजेश कुमार नामदेव उर्फ गूल्लू और दूसरा सात वर्षीय चिंटू पुत्र सेवक था। कुछ ही देर में परिजन भी घटनास्थल आ गए। अलीगंज चौकी पुलिस ने दोनों शवों का पंचनामा कराया। दोनों बच्चे आपस में ममेरे भाई थे। लखन का पिता और चिंटू की मां आपस में भाई-बहन हैं। चिंटू की मां झांसी में ब्याही थी। एक साल पहले उसकी मौत होने पर यहां मामा के पास रह रहा था। घर वालों ने बताया कि दोनों बच्चे सोमवार को दोपहर बाद लापता हो गए थे। शायद वह भी महबुलिया विसर्जन के जत्थे में बच्चों के साथ तालाब चले गए। पानी में डूबते समय किसी की नजर नहीं पड़ी।