बांदा। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने सूखाग्रस्त
बुंदेलखंड को 24 घंटे बिजली का फरमान गुरुवार को फिर जारी किया है। इसके
पहले 26 नवंबर को जारी इसी आदेश की हवा निकल चुकी है।
बुंदेलखंड को
24 घंटे तो दूर, बमुश्किल पांच-छह घंटे भी बिजली नहीं मिल पा रही है।
मुख्यमंत्री के ताजे आदेश की जबरदस्त प्रतिक्रिया हुई है।
लोगों का
कहना है कि सीएम आदेश पर आदेश जारी कर रहे हैं, उन पर अमल की व्यवस्था
नहीं कर रहे हैं। अधिकारी मनमानी पर आमादा हैं। उनकी नकेल कसने वाला कोई
नहीं है। सीएम के आदेश हवा में उड़ाए जा रहे हैं।
बुंदेलखंड में 24
घंटे बिजली के आदेश की खबर ‘अमर उजाला’ ने पिछले माह 26 नवंबर को प्रकाशित
की थी। तब लोगों को हालात संवरने की उम्मीद जगी थी।
तब पावर
कारपोरेशन ने व्यवस्था की थी कि गांवों को बारी-बारी से फीडरवार 12 घंटे
बिजली दी जाएगी। यह व्यवस्था ध्वस्त हो गई। किसानों को शायद ही कभी भरपूर
बिजली मिली हो।
लखनऊ में बृहस्पतिवार को बुंदेलखंड में सूखे के
संकट पर मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने फिर उच्चस्तरीय बैठक की। इसमें
बुंदेलखंड को 24 घंटे बिजली का एक माह पुराना आदेश दोहरा दिया गया।
अब
कारपोरेशन ने 12 घंटे की अवधि को बढ़ाकर 20 घंटे कर दिया है। लोगों का
कहना है कि 12 घंटे बिजली देने में तो कारपोरेशन को पसीने छूट रहे हैं, 20
घंटे बिजली कहां से देगा।
लखनऊ में बृहस्पतिवार को हुई बुंदेलखंड के चित्रकूटधाम व झांसी मंडलों के आयुक्त और सातों जिलों के डीएम उपस्थित थे।
मुख्यमंत्री
अखिलेश यादव और मुख्य सचिव आलोक रंजन ने बैठक में अन्य कई आदेशों के अलावा
पावर कारपोरेशन को फिर निर्देश दिए कि बुंदेलखंड में 31 जनवरी तक 24 घंटे
बिजली आपूर्ति की जाए।
बैठक के तत्काल बाद पावर कारपोरेशन के
प्रबंध निदेशक एपी मिश्रा ने जारी आदेश में बुंदेलखंड के कारपोरेशन
अधिकारियों को सीएम के आदेशों का हवाला देकर निर्देश दिया कि ग्रामीण
क्षेत्रों में न्यूनतम 20 घंटे की बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जाए, ताकि
रबी फसल की बुवाई हो सके।
प्रबंध निदेशक ने बुंदेलखंड में 24 घंटे
बिजली की उपलब्धता और गांवों को 20 घंटे रोजाना आपूर्ति का शेड्यूल तत्काल
प्रभाव से जारी कर दिया है।
साथ ही कहा कि सभी जिलों के स्टोर में
25, 63 और 100 केवीए क्षमता के ट्रांसफार्मर पर्याप्त संख्या में उपलब्ध
होना सुनिश्चित किया जाए।
प्रबंध निदेशक ने दक्षिणांचल पावर
कारपोरेशन के निदेशक (तकनीकी) और पारेषण के निदेशक (आपरेशन) को संयुक्त रूप
से बुंदेलखंड के सभी जिलों का दौरा करने और टेप आदि बढ़ाकर लो-वोल्टेज का
निराकरण कराने का निर्देश दिया है।
यह भी कहा है कि यह अधिकारी
भ्रमण के दौरान कमिश्नर और डीएम से मिलें और उन्हें स्थिति से अवगत कराएं।
प्रबंध निदेशक ने खबरदार किया है कि इन आदेशों पर तत्काल अमल हो और की गई
कार्रवाई से प्रदेश के मुख्य सचिव को भी अवगत कराया जाए।
पावर
कारपोरेशन भले ही गांवों को 12 घंटे बिजली और पर्याप्त वोल्टेज का दावा कर
रहा हो पर जमीनी हकीकत यह है कि माह भर पूर्व लागू इस व्यवस्था में अब तक
गांवों को न तो नियमित 12 घंटे बिजली मिल पा रही है और न ही पर्याप्त
वोल्टेज।
लो वोल्टेज की समस्या की शिकायतों का अंबार लगा है। नलकूप
नहीं चल पा रहे और रबी की बुवाई ठप है। नवंबर के आखिरी हफ्ते में
बुंदेलखंड के 24 घंटे बिजली का सरकार ने निर्देश दिया था।
चित्रकूटधाम
मंडल में स्थानीय अधिकारियों ने बारी-बारी से फीडरवाइज 12-12 घंटे गांवों
को बिजली आपूर्ति का शेड्यूल लागू करने की घोषणा की थी।
पावर
कारपोरेशन मुख्य अभियंता एके सक्सेना ने कहा था कि एक साथ सभी फीडरों को
आपूर्ति किए जाने से लो-वोल्टेज की समस्या आएगी, इसलिए फीडरवाइज 12-12 घंटे
आपूर्ति की व्यवस्था लागू की गई ताकि वोल्टेज पर्याप्त मिले।
मंडल
के चारों जनपदों में रोजाना यही शिकायतें आ रही हैं कि न तो 12 घंटे बिजली
मिल रही है, न पर्याप्त वोल्टेज। इस कारण अभी भी ट्यूबवेल नहीं चल पा रहे।
बांदा के बबेरू क्षेत्र के मरका, औगासी, कमासिन आदि इलाकों में लो वोल्टेज
का संकट जस का तस है।
मंडल मुख्यालय से बमुश्किल 25 किमी दूर
स्टेट हाईवे पर स्थित पलरा सब स्टेशन से जुड़े गुगौली, बरेठी, बंबिया,
दतरौली, महेदू आदि गांवों में मात्र पांच घंटे बिजली मिल रही है।
चित्रकूट
में ग्रामीण क्षेत्रों में बमुश्किल 6 से 10 घंटे आपूर्ति हो रही है। यहां
भी लो-वोल्टेज का संकट है। कर्वी ब्लाक के भगवतपुर, कोल्हौवां और राजापुर
क्षेत्र के सरधुवा, अरकी आदि गांवों में बिजली संकट से निजात नहीं मिल रही।
यहां के अधिशासी अभियंता (वितरण) का कहना है कि फीडर पुराने हैं
इसलिए लो-वोल्टेज समस्या है। हमीरपुर जनपद से मिली खबरों के मुताबिक गांवों
में बमुश्किल 7-8 घंटे आपूर्ति हो रही है।
जखेला, बरुआ बिलौरा,
खरौंच के किसानों ने बताया कि लो वोल्टेज से नलकूप नहीं चल पा रहे। सिंचाई
नहीं हो पा रही। एक्सईएन नेकीराम का कहना है कि 24 घंटे आपूर्ति के निर्देश
दिए गए हैं।
महोबा जनपद में भी यही हालात हैं। जितने घंटे बिजली
आपूर्ति मिल रही है, वोल्टेज बेहद लो रहता है। ट्यूबवेल नहीं चल पा रहे।
सारंगपुरा, छतेउरा, छुरत आदि गांवों के किसानों ने अधिकारियों के दावों को
सरासर झूठ बताया है।
चित्रकूटधाम मंडल के मुख्य अभियंता (पावर
कारपोरेशन, दक्षिणांचल) एके सक्सेना का कहना है कि गांवों में 12 घंटे
बिजली दी जा रही है। अब मुख्यमंत्री और प्रबंध निदेशक ने 20 घंटे का आदेश
दिया है तो उस पर भी अमल होगा।
पूरे मंडल के गांवों से लो-वोल्टेज
और महज चंद घंटे आपूर्ति की मिल रही खबरों को खारिज करते हुए मुख्य अभियंता
ने कहा कि कुछेक दूरस्थ गांवों को छोड़कर सभी जगह पर्याप्त वोल्टेज और
फीडरवाइज 12-12 घंटे आपूर्ति की जा रही है। उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष की
अपेक्षा इस वर्ष वोल्टेज में सुधार हुआ है।
यह भी कहा कि मंडल के
ट्रांसमिशन की क्षमता 320 एमवीए की है, जबकि लोड 550 एमवीए का है। यानी 230
एमवीए की ओवरलोडिंग है। इसीलिए बारी-बारी से फीडरवार आपूर्ति किया जाना
मजबूरी है।
मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव द्वारा दिए गए आदेशों पर
कारपोरेशन के प्रबंध निदेशक ने गांवों में न्यूनतम 20 घंटे की आपूर्ति का
जो शेड्यूल जारी किया है उस पर अमल किया जाएगा।
इस सवाल पर कि जब
12 घंटे ही आपूर्ति नहीं हो पा रही तो 20 घंटे कैसे होगी? मुख्य अभियंता ने
कहा कि हर संभव व्यवस्थाएं करके शासन के आदेशों का पालन किया जाएगा।