बुंदेलखंड पैकेज से बीपीएल परिवारों को मुफ्त में
अच्छी और दुधारू नस्ल की बकरियां देकर उनकी आर्थिक तंगी दूर करने की मंशा
पूरी नहीं हुई।
बीमार और खराब नस्ल की साढ़े तीन हजार से ज्यादा
बकरियों ने लाभार्थियों के घर कदम रखते ही दम तोड़ दिया। बकरी पालन योजना
की यह कलई जांच में खुली। अभिलेखों में लाभार्थियों को 1.40 करोड़ रुपये की
बकरियां बांटी जाना दर्शाया गया था।
वर्ष 2009 में बांदा जनपद के
सभी ब्लाकाें में लाभार्थियों का चयन कर बुंदेलखंड पैकेज से उन्हें मुफ्त
बकरियां दी गई थीं। हरेक लाभार्थी को 10 बकरियां और बकरा दिया गया था। इसे
एक यूनिट नाम दिया गया था। जनपद में 440 लाभार्थियों को 4840 बकरियां बांटे
जाने का दावा किया गया था।
हालांकि शुरू में यह शिकायतें हुई थीं
कि लाभार्थियों की बकरी में कटौती की गई। उन्हें बीमार और घटिया बकरी दी
गई। शासनादेश के तहत हरेक लाभार्थी को बरबरी नस्ल की बकरी दी जानी थी।
जनपद
के आठों ब्लाकों में 400 यूनिट अर्थात 4400 बकरियां बांटी जानी दिखाई थी।
मंडलायुक्त मुरलीधर दुबे ने खंड विकास अधिकारी की अगुवाई में तीन सदस्यीय
टीमें बनाकर हरेक ब्लाक में बकरी पालन योजना का सत्यापन कराया।
इसमें
खुलासा हुआ कि 4400 में मात्र 880 बकरियां लाभार्थियों के पास पाई गईं।
3520 बकरियां का कुछ अता-पता नहीं। इन बकरियाें की कीमत 1,11,97,120 रुपये
के आसपास है। प्रति बकरी की कीमत 3181 रुपये बताई गई है। ज्यादातर
लाभार्थियों ने कहा कि बीमारी से बकरियां मर गईं।
यह खुलासा होने
के बाद पशुपालन विभाग के अधिकारियों पर कार्रवाई का खतरा मंडराने लगा है।
मंडलायुक्त ने कहा कि जांच रिपोर्ट आने के बाद कार्रवाई की जाएगी।
बकरी
पालन योजना में नियमत: लाभार्थी को बकरियों के मरने की सूचना विभाग देना
चाहिए ताकि उनके शव का पोस्टमार्टम कराया जा सके और सूचना व रिपोर्ट बीमा
कंपनी को भेजी जा सके।
यह औपचारिकता पूरी होने पर ही लाभार्थी को
बीमा कंपनी क्लेम देती है। बीमारी की स्थिति में भी अपने नजदीकी पशु
चिकित्सा केंद्र प्रभारी को सूचना देने का प्रावधान है।
डॉ. राकेश रंजन शुक्ला, उप निदेशक/मुख्य पशु चिकित्साधिकारी, बांदा।