धान के खेतों में छिड़काव विधि से छह-आठ िक्वंटल प्रति बीघा गेहूं की उपज भी किसान ले रहे हैं। लागत व समय दोनों की बचत हो रही है। केन नहर किनारे हजारों बीघा जमीन में धान कटने के बाद गेहूं की फसल लहलहा रही है।
अतर्रा तहसील क्षेत्र के गुमाईं, अनुथवा, खम्हौरा, नगनेधी, खुरहंड, चौरिहन पुरवा, लोधन पुरवा, गोखिया, अतर्रा ग्रामीण आदि में करीब एक हजार एकड़ जमीन धान के फसल के बाद बेकार पड़ी रहती थी। नहर किनारे होने से इन खेतों में पानी भरने से बुवाई में भी बिलंब हो जाता था।
किसानों ने छिड़काव विधि से गेहूं की फसल की आजमाइश की तो यह सफल साबित हुई। धीरे-धीरे अब ज्यादातर किसान धान की फसल के बाद छह-आठ कुंतल गेहूं की उपज प्रति बीघा इस जमीन से ले रहे हैं।
किसान शिवलाल तिवारी, रामस्वरूप, शिवराम, वीरेंद्र सिंह राजपूत, फूलचंद्र वर्मा, राजेश द्विवेदी, ब्रह्मदत्त शुक्ल, अखिलेश तिवारी, लक्का प्रजापति, सल्हा रैकवार, रामऔतार वर्मा आदि इस विधि से बेहद खुश हैं। उनका कहना है कि गेहूं की जुताई व बुवाई के बिना समय व धन की बर्बादी बचती है। अच्छी फसल भी लेते हैं।
उधर, कृषि फार्म अधीक्षक लेखराज निरंजन ने कहा कि यह विधि किसानों की बदहाली दूर करने में सक्षम है। बशर्ते प्रबंधन उचित व सही समय पर किया जाए।
ये है छिड़काव विधि
खेत में धान की फसल कटने से 10 दिन पूर्व उसमें प्रति बीघा 20 किलो गेहूं के बीज का छिड़काव किया जाता है। धान कटाई के समय बीज अंकुरित हो जाते हैं। कटा हुआ धान इन अंकुरण पर फैला दिया जाता है। इससे पक्षियों से बीज की सुरक्षा हो जाती है और धान भी सूख जाता है। 15 दिन बाद धान की फसल को समेटकर उसमें खाद का छिड़काव करते हैं।