बांदा। एनआरएलएम में 88 लाख रुपये के सीआईएफ गबन मामले में विभाग हाथ पर हाथ धरे बैठा है। एफआईआर के बाद भी वसूली की कार्रवाई नहीं हो रही। आउटसोर्सिंग पर कार्यरत भ्रष्टाचार में लिप्त आरोपी एक के बाद एक इस्तीफा देकर भाग रहे हैं।
एनआरएलएम में वर्ष 2024 को स्वयं सहायता समूह को शासन रिवाल्विंग फंड के नाम पर 1.10 लाख का ऋण उपलब्ध कराता है। ब्लाॅक बड़ोखर खुर्द व महुआ में तमाम स्वयं सहायता समूह के खाते में रिवाल्विंग फंड दो से तीन बार डाल दिया गया और बाद में वह पैसा समूह से वापस ले लिया गया, लेकिन उसे सरकारी कोष में जमा नहीं किया गया।
मामले का खुलासा होने पर तत्कालीन डीसी उपायुक्त एनआरएलएम प्रेमनाथ यादव ने जांच की। इसी बीच उनका स्थानांतरण हो गया। नए डीसी एनआरएलएम भइययन लाल ने जांच में भ्रष्टाचार साबित होने पर 30 अगस्त 2024 को कोतवाली नगर में 88 लाख के गबन का धारा 419, 420, 409 के तहत केस दर्ज कराया, जिसमें बीएमएम आकांक्षा कुशवाहा सहित पांच को आरोपी बनाया गया।
इस मामले में अभी तक विभाग ने रिकवरी की न तो कार्रवाई की और न ही पुलिस ने न्यायालय में चार्जशीट दाखिल की है। मामले को दबाने का कथित प्रयास किया जा रहा है। बताते है कि भ्रष्टाचार में लिप्त तीन आरोपी इस्तीफा देकर भाग गए हैं। दो अन्य आरोपी भी इस्तीफा देकर भागने की फिराक में है। यह सभी कर्मचारी आउटसोर्सिंग में काम कर रहे थे।
इस संबंध में डीसी उपायुक्त एनआरएलएम भइया लाल का कहना है कि भ्रष्टाचार में लिप्त आरोपियों को रिकवरी के लिए नोटिस जारी किया है। मामला अब पुलिस व अदालत के बीच है। लिहाजा आरोपियों से आरसी के जरिए वसूली नहीं की जा सकती है। अदालत से निर्णय के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।