बांदा। रोडवेज बसों में लगे फर्स्ट एड बाक्स धूल फांक रहे हैं। अरसे से इन बाक्सों में न तो दवाइयां भरी गई हैं और न ही उनकी साफ-सफाई हुई है। साधारण बस सेवा ही नहीं जनरथ एसी बस का भी यही हाल है। आरएम का कहना है कि परिचालक के पास दवाइयां और मरहम पट्टी उपलब्ध रहती हैं।
परिवहन निगम के चित्रकूटधाम मंडल रीजन मुख्यालय के बांदा डिपो में 118 रोडवेज बसें हैं। इनमें तीन एसी जनरथ बसें भी शामिल हैं। किसी भी रोडवेज बस के फर्स्ट एड बाक्स में दवाइयां नहीं हैं, सिर्फ कचरा भरा है। ज्यादातर फर्स्ट एड बाॅक्स जर्जर होकर लटक गए हैं। इनमें दवाइयां, मरहम पट्टी भरना तो दूर, इनकी मरम्मत तक नहीं कराई गई है। ऐसे में सफर के दौरान चोट लगने या फिर अन्य समस्या होने पर फौरी तौर पर उपचार मिल पाना नामुमकिन है।
चित्रकूटधाम मंडल रीजन के क्षेत्रीय प्रबंधक संदीप अग्रवाल ने कहा कि फर्स्ट एड बाक्स जर्जर हो जाने की वजह से उनमें दवाइयां नहीं भरी जा रही हैं। आरएम ने कहा कि वर्तमान में दवाएं परिचालक को दे दी जाती हैं। यात्रियों को परेशानी होने पर वह परिचालक से दवाएं प्राप्त कर सकते हैं।
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मुख्यालय से दवाओं के लिए मिलता है बजट
परिवहन निगम अपने यात्रियों को हर संभव बेहतर सुविधा उपलब्ध कराने का दावा करता है। रोडवेज बसों में फर्स्ट एड बाक्स में मरहम पट्टी, उल्टी और दर्द की दवाएं भरने के लिए मुख्यालय की ओर से बजट भी उपलब्ध कराया जाता है लेकिन बाक्स में दवाएं भरने की बजाय अधिकारी और कर्मचारी अपनी जेबें भरने का काम करते हैं।