प्रशासन द्वारा भेजा गया समाजवादी राहत राशन।
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बड़ोखर बुजुर्ग (बांदा)। चार दिन से घर में चल रही फाकाकशी के बाद समाजवादी राहत राशन लेने जा रहे भूमिहीन दलित की रास्ते में पानी पीते ही मौत हो गई। खाली पेट हीटस्ट्रोक (लू) भी मौत की वजह हो सकती है। यह खबर फैलते प्रशासन ने आननफानन समाजवादी राहत के राशन पैकेट उसके घर पहुंचा दिए। नरैनी तहसील के ऐला गांव के मूंगुस पुरवा में 40 वर्षीय दलित नत्थू प्रसाद पुत्र जग प्रसाद भूमिहीन था। वह रिश्तेदारों की ओर से दिए गए कच्चे खपरैलदार मकान में पत्नी और आधा दर्जन बच्चों के साथ रह रहा था।
सूखे के हालात मेें गांव में पति-पत्नी को मजदूरी भी नहीं मिली। हालांकि नत्थू के पास मनरेगा का जाब कार्ड था। गरीबी के चलते दो नाबालिग बेटे नासिक पलायन कर गए। वे वहां आइसक्रीम बेंचकर पेट भर रहे हैं। इधर करीब चार दिन से नत्थू के घर चूल्हा नहीं जला। पास पड़ोस के लोग अक्सर उसे और उसके परिवार को खाना दे देते थे लेकिन इस बीच पड़ोसियों को भी उसके घर चूल्हा न जलने की भनक नहीं लगी।
रविवार को नत्थू को पता चला कि मंगलवार को ऐला गांव मेें समाजवादी राशन पैकेट बांटे जाएंगे। वह भूखे पेट ही पैकेट लेने के लिए ऐला गांव की ओर चल पड़ा। मूंगुस पुरवा से ऐला की दूरी करीब डेढ़ किलोमीटर है। लू के गर्म थपेडे़ सहता हुआ नत्थू आगे बढ़ रहा था। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक रास्ते में हैंडपंप से पानी पीने लगा। पानी पीते ही वह गिर पड़ा और उसकी वहीं मौत हो गई। भाग कर उसके पास पहुंचे लोगों ने उसका शव घर पहुंचाया। दोनों बेटों के इंतजार में शव रखा रहा। 17 वर्षीय पुत्र दिलीप और 14 वर्षीय संदीप के आने पर मंगलवार को नत्थू का पोस्टमार्टम कराए बगैर अंतिम संस्कार कर दिया गया।
अंतिम संस्कार के बाद नत्थू की मौत चर्चा में आ गई। मीडिया वाले पहुंचे तो अधिकारियों की भी नींद टूटी। आनन फानन समाजवादी राशन पैकेट मृतक के घर पहुंचा दिया गया। उप जिलाधिकारी नरैनी ने कोटेदार से 35 किलो गेहूं, चावल भी भेजवा दिया। मृतक के नाम अंत्योदय राशन कार्ड भी था। पत्नी मुन्नी ने बताया कि अंत्योदय कार्ड में मिलने वाला राशन आठ सदस्यीय परिवार के लिए नाकाफी था। यह 15 दिन में ही खत्म हो जाता था। इसके बाद शेष पखवारा फाकाकशी या पड़ोसियों द्वारा दिए गए खाने से गुजरता था। पत्नी ने बताया कि चार दिन से घर में खाना नहीं बना था।
यह भूखजनित मौत की श्रेणी में है। अधिकारी हार्टअटैक बता रहे हैं। शव का पोस्टमार्टम न होने से यह गुत्थी सुलझ नहीं पाई। अधिकारियों को अपने बचाव का भी मौका मिल गया। मृतक के घर पहुंचे नरैनी एसडीएम का कहना था कि मौत भूख से नहीं बल्कि हार्टअटैक से हुई है। डीएम योगेश कुमार ने भी एसडीएम की रिपोर्ट का हवाला देकर कहा कि भुखमरी से मौत का कोई भी तथ्य नहीं पाया गया है। उसे पिछले माह अंत्योदय कार्ड से राशन दिया गया था। डीएम ने कहा कि जांच कराई जा रही है। मृतक के आश्रितों को हर संभव मदद दिलाई जाएगी।