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युवक ने खुदकुशी की, घर वाले बोले-कोराना से खौफजदा था

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बांदा। दिल्ली में राजमिस्त्री का काम करने वाले 35 वर्षीय युवक ने गले में फंदा कसकर जान दे दी। घर वालों का कहना है कि जुकाम-खांसी, बुखार की चपेट में होने से वह खुद को कोरोना पीड़ित मानकर डरा हुआ था। स्वास्थ्य महकमे और पुलिस ने घर वालों के इस कथन को खारिज किया है।सवाल उठाया है कि खांसी-जुकाम, बुखार की दवा के लिए पीएचसी या सीएचसी की मदद क्यों नहीं ली।
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मूलरूप से हमीरपुर जिले के चिल्ली गांव का रहने वाला राजेंद्र (35) पुत्र रामआसरे की बांदा के जमालपुर (कोतवाली देहात) में ससुराल है। वह दिल्ली में परिवार के साथ रहकर राजगीरी करता था। मार्च में साले रामबाबू की शादी में ससुराल आया था। शनिवार की शाम ससुराल में उसने घर की छत में लगे जाल में रस्सी का फंदा लगाकर गले में कस लिया। कुछ देर बाद शव लटका देख घर वालों को खुदकुशी का पता चला।
मृतक के साले महेश ने बताया कि दिल्ली से आने के बाद से ही राजेंद्र जुुकाम, खांसी और बुुखार से ग्रस्त था। गांव में लोगों की सलाह से दवा खा रहा था। सुधार न होने पर उसके मन में कोरोनाग्रस्त होने का डर बैठने लगा था। उसी डर में खुदकुशी की है।
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कोतवाली देहात निरीक्षक धर्मेंद्र कुमार ने बताया कि परिजनों ने आत्महत्या की सूचना देते समय ऐसा कारण नहीं बताया। अब मृतक का साला दूसरों से ऐसी बात कह रहा है। इस बाबत पूछने पर सीएमओ डॉ. संतोष कुमार ने भी कोरोना के डर की बात को खारिज किया। कहा कि संदिग्ध लोगों या संदेह रखने वालों की फोन कॉल पर भी स्वास्थ्य टीम जांच के लिए पहुंच रही है। मृतक या उसके परिवार ने जिला अस्पताल से लेकर सीएचसी, पीएचसी कहीं अपने इलाज की कोशिश नहीं की। ऐसे में कोरोना के संदेह में जान देने की बात गले नहीं उतरती।
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