शहीदाने कर्बला जलसे मेें बोलते मौलाना रुहुल अमीन (जबलपुर)।
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बांदा। मोहर्रम माह की 18वीं तारीख की रात अलीगंज स्थित मदरसा दारुल उलूम रब्बानियां में 20वां ‘एक शाम खानदाने हुसैन के नाम’ जलसा आयोजित किया। जलसे के मुख्य वक्ता (खतीब) लंदन से आए अल कुरान फाउंडेशन के चेयरमैन सैय्यद अबुल हसन अशरफी थे। उन्होंने कहा कि हजरत इमाम हुसैन नस्ले रसूल में हैं। उन्होंने जो कुर्बानी दी है वो बेमिसाल है। पूरी दुनिया में हर धर्म-मजहब के लोग इस शहादत का एहतराम करते हैं।
जबलपुर से आए मौलाना रुहुल अमीन ने साइंस और कुरान का जिक्र किया। कहा कि कुरान जो बातें 1400 साल पहले बता चुका है वह आज साइंस से साबित हो रही हैं। बिल्हौर से आए मौलाना सैय्यद नइयर रब्बानी ने कहा कि अहले बैत की कर्बला में शहादत पूरी दुनियां के लिए इबरत है।
सैय्यद वाजिद अली रब्बानी ने भी कर्बला का वाक्या बयां किया। मौलाना सैय्यद आबिद रब्बानी ने मनकबती शेर पढ़ा- ‘किस कदर मासूम जिद है असगरे मासूम की, हैं तो नन्हें से मगर हिस्सा बराबर चाहिए’। सैय्यद अशअर रब्बानी ने भी शेर पढ़ा। सदारत मौलाना मेराज मसूदी अकील मियां ने की।
बड़ी संख्या में लोग रात भर जलसे में डटे रहे। सैय्यद मुशर्रफ (जबलपुर) और सैय्यद हस्सान मसूदी ने निजामत (संचालन) किया। सैय्यद फैजान रब्बानी, रिजवान रब्बानी, राहत रब्बानी, अदनान रब्बानी, अकबर रब्बानी, गुफरान रब्बानी और सैय्यद मुमताज रब्बानी आदि मंच पर मौजूद रहे।