बांदा। भाजपा ने स्वाति सिंह का मुद्दा फिर गरमा दिया। इस मुद्दे पर प्रदेशव्यापी आह्वान पर यहां भाजपा नेताओं ने प्रदर्शन कर ‘बेटी के सम्मान में, भाजपा मैदान में’ का नारा दिया। डीएम और एसपी के माध्यम से राज्यपाल को ज्ञापन भेजकर प्रदेश सरकार को बर्खास्त कर राष्ट्रपति शासन लागू करने की मांग की।
पीली कोठी स्थित भाजपा कार्यालय से भाजपा का प्रदर्शन शुरू हुआ। प्रदेश सरकार और बसपा के कई नेताओं के विरुद्ध नारे लगाते हुए कलेक्ट्रेट आए। डीएम के कक्ष में भाजपा नेताओं के जत्थे ने प्रवेश करना चाहा तो वहां पहले से बड़ी संख्या में मौजूद पुलिस आड़े आ गई।
कुछ देर पुलिस और भाजपा नेताओ के बीच तीखी नोकझोंक चली। हंगामा भी हुआ। अंतत: पांच वरिष्ठ नेताओं को अंदर जाने की अनुमति मिली। उन्होंने डीएम को ज्ञापन सौंपा। भाजपा नेताओं का जुलूस यहां से पुलिस कार्यालय आया। एसपी राजेंद्र प्रसाद पांडेय को ज्ञापन दिया। यहां भी देर तक नारे गूंजते रहे।
भाजपा के ज्ञापन में कहा गया है कि पूरे प्रदेश में मां-बेटियों का लगातार अपमान हो रहा है। बुलंदशहर का मामला ताजा उदाहरण है। भाजपा नेताओं ने अपने ज्ञापन में कहीं भी न तो दयाशंकर सिंह या उनकी पत्नी स्वाति सिंह का नाम स्पष्ट लिखा। न ही किसी बसपा नेता का नाम शामिल किया। इसे यूं लिखा कि पिछले दिनों मां-बेटी व उसके परिवार को एक जिम्मेदार नेता ने अमर्यादित शब्द कहे थे।
उनकी गिरफ्तारी नहीं हो सकी। भाजपा ने अपने ज्ञापन में हाल ही में सपा नेताओं द्वारा महिला से किए गए गैंगरेप का जिक्र भी किया है। इसमें भी आरोपी गिरफ्तार नहीं हुए। भाजपा नेताओं ने महिलाओं का सम्मान बचाने को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार को बर्खास्त करके राष्ट्रपति शासन लागू करने की मांग की।
प्रदर्शन में क्षेत्रीय उपाध्यक्ष डॉ. बीना आर्या, जिलाध्यक्ष इंद्रपाल सिंह पटेल, पूर्व अध्यक्ष बाल मुकुंद शुक्ला व पुरुषोत्तम पांडेय, अखिलेश श्रीवास्तव, संतोष कुमार गुप्ता, प्रभा गुप्ता, प्रकाश द्विवेदी, पुष्कर द्विवेदी, जिला पंचायत पूर्व अध्यक्ष महेंद्र सिंह वर्मा व जगराम सिंह, सुखदेव प्रसाद, शीला सिंह, विजय सिंह चौहान, धर्मेंद्र त्रिपाठी, रागिनी शिवहरे, राकेश गुप्ता दद्दू, विजय बहादुर सिंह, आनंद स्वरूप द्विवेदी, सौरभ गुप्ता, राजभवन, पंकज रैकवार, नागेश खरे, संतोष अवस्थी, अशोक त्रिपाठी, राजेश धुरिया, विजय पाल सिंह, देवेंद्र प्रताप सिंह, श्याम सिंह, बीडी प्रजापति, उत्कर्ष गुप्ता, अमरमणि, श्यामाचरण, रामहित निषाद भी शामिल रहे।