बांदा। सीएमओ बांदा के पद पर रहते हुए आशा कार्यकर्ता भर्ती प्रकरण में अनियमितता की जांच में सहयोग न करने के दोषी पाए गए तत्कालीन सीएमओ अनिल श्रीवास्तव की मुश्किलें कम नहीं हुई हैं। अब उन पर आउट सोर्सिंग से की गईं 11 नियुक्तियों की जांच और बिना निविदा के सीएमओ कार्यालय के मीटिंग हाल और जिला टीबी अस्पताल में कराए गए कार्यों पर भी सवाल खड़े हुए हैं। शिकायतकर्ताओं की शिकायत पर शासन से तीन सदस्यीय टीम ने दोनों प्रकरणों की जांच की है। जांच टीम के समक्ष तत्कालीन सीएमओ ने अपना पक्ष भी रखा है।
बदायूं जिले में वरिष्ठ परामर्शदाता के रूप में तैनात अनिल श्रीवास्तव के खिलाफ पदमाकर चौराहा निवासी विपिन कुमार ने जिलाधिकारी और अपर निदेशक चिकित्सा एवं परिवार कल्याण से शिकायत करते हुए आरोप लगाया था कि 27 फरवरी को अनिल कुमार श्रीवास्तव का बांदा सीएमओ पद से स्थानांतरण कर दिया गया था। उन्होंने अपने स्थानांतरण के बाद 22 व 26 फरवरी को पूर्व में किए गए डिस्पैच में एबीसीडीईएफ करके षड्यंत्र के तहत 11 की नियुक्तियां संबंधित लिपिक डिस्पैच के साथ मिलकर कीं।
उनके चहेते लिपिकों ने 27 फरवरी से तीन मार्च तक स्टेट बजट व एनएचएम बजट से लाखों रुपये के भुगतान जल्दी जल्दी कराए गए। इस मामले में चित्रकूट धाम मंडल के चिकित्सा एवं परिवार कल्याण संयुक्त निदेशक डॉ. अभय सिंह व डॉ. बीके ने जांच की। जांच टीम ने पाया कि आउट सोर्सिंग की भर्ती एवं डिस्पैच पंजिका में अनियमितता के आधार पर तत्कालीन सीएमओ को प्रथम दृष्टया दोषी प्रतीत होना बताया है।
बजट को लेकर आरोपों के संबंध में टीम का कहना है कि अभिलेख उपलब्ध नहीं कराए गए हैं। उधर, शहर निवासी सूर्यकुमार ने शिकायत कर आरोप लगाया कि सीएमओ कार्यालय के मीटिंग हाल और टीबी अस्पताल का निर्माण कार्य बिना निविदा के कराया है। शिकायत का संज्ञान लेकर अधीक्षण अभियंता चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं लखनऊ ने संयुक्त निदेशक बीके, डॉ. अभय कुमार सिंह, सहायक अभियंता सोम शेखर को जांच अधिकारी बनाया है। जांच अधिकारियों ने बांदा पहुंचकर जांच की है। तत्कालीन सीएमओ अनिल श्रीवास्तव ने बांदा पहुंचकर अपने बयान दर्ज कराए हैं। इससे तत्कालीन सीएमओ की मुश्किलें बढ़ गई हैं।
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वर्जन
दो दिन पहले जांच टीम के समक्ष बयान दर्ज कराने आए थे। आशा कार्यकर्ता भर्ती वर्ष 2019 में हुई थी। वह बांदा में 2022 में रहे हैं। आउट सोर्सिंग भर्ती एजेंसी करती है उन्होंने सिर्फ नियुक्ति पत्र दिए हैं। बिना निविदा के निर्माण कराने का आरोप गलत हैं। तीनों मामले में अपना पक्ष रखा है।
-अनिल श्रीवास्तव, तत्कालीन सीएमओ, बांदा
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