बांदा। चित्रकूटधाम मंडल में गर्मी के दस्तक देते ही बांधों में पेयजल संकट की आहट भी शुरू हो गई है। तापमान चढ़ने के साथ ही गर्मी के मौसम में मंडल में खेत और पेट दोनों के लिए ही पानी का संकट होने के पूरे आसार हैं। बेमौसम बारिश न हुई तो संकट ज्यादा गहरा सकता है। मंडल के सभी 13 बांधों में मात्र 3 में ही 50 फीसदी से ज्यादा पानी बारिश में भर पाया था। कई बांधों में पानी का भंडार 3 से 13 फीसदी ही रह गया है।
चित्रकूटधाम मंडल में अबकी भी मानसून मामूली रहा। बांधों के जल संग्रह क्षेत्रों में भरपूर बारिश न होने से बांध पानी से लबालब नहीं हो पाए। सिंचाई विभाग के आंकड़े बताते हैं कि बांधों में पानी का भंडार बेहद कम हैं। मात्र महोबा के अर्जुन बांध, चंद्रावल बांध और कबरई बांध में ही 50 फीसदी से ज्यादा पानी भर पाया था।
लेकिन अब इन बांधों का जलस्तर और घट गया है। गंगऊ में 7.27, रनगवां में 8.77 और बरियारपुर वियर में मात्र 4.19 मिलियन घनमीटर उपयोगी पानी ही बचा है। चित्रकूट के दोनों बांधों की स्थिति और खराब है। यहां ओहन और बरुआ बांधों में मात्र 1.01 व 1.08 मिलियन घनमीटर पानी है यानी बांधों की तलहटी पर ही पानी बचा है।
सिंचाई विभाग ने बांधों की स्थिति से शासन को रिपोर्ट भेजकर अवगत कराया है। विभागीय अभियंताओं का कहना है कि बारिश से ही बांधों में पानी बढ़ सकता है। बांदा सिंचाई विभाग अधीक्षण अभियंता श्यामजी चौबे ने हाल ही में गंगऊ बांध का जायजा लिया। उनके साथ सहायक अभियंता घनश्याम और अवर अभियंता वेद प्रकाश गौड़ भी थे।
चित्रकूटधाम मंडल के बांधों में उपलब्ध पानी (मिलियन घनमीटर में)
बांध उपयोगी पानी भरने का प्रतिशत
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गंगऊ (छतरपुर) 7.27 13
रनगवां (छतरपुर) 8.77 6
बरियारपुर (पन्ना) 4.19 33
ओहन (चित्रकूट) 1.01 3
बरुआ (चित्रकूट) 1.08 5
गुंता (चित्रकूट) 8.87 36
रसिन (चित्रकूट) 6.50 48
अर्जुन (महोबा) 30.01 51
चंद्रावल (महोबा) 21.74 70
कबरई (महोबा) 25.40 85
मझगवां (महोबा) 0.18 0
उर्मिल (महोबा) 5.02 4
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