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दगा दे गए चित्रकूटधाम मंडल के बांध

Mon, 05 Oct 2015 11:28 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बांदा
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बांदा। अभी मानसून पूरी तरह विदा भी नहीं हुआ है और चित्रकूटधाम मंडल के बांधों में पानी का टोटा पड़ गया है। मंडल के दर्जन भर से ज्यादा बांधों में नाममात्र का पानी है।
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15 अक्तूबर को मानसून खत्म होना मानकर सिंचाई विभाग बांधों के गेट खड़े करता है। गंगऊ बांध में सिर्फ 755.19 एमसीएफटी पानी है। यह सिर्फ दस दिन नहर चलाने के लिए है, जबकि बरियारपुर में 140 एमसीएफटी पानी गर्मी के लिए सुरक्षित रखा जाएगा। रनगवा में बांध में 662 एमसीएफटी पानी में 350 यूपी के खाते में आएगा, बाकी पानी मध्य प्रदेश के हिस्से का है।

चित्रकूटधाम मंडल में बारिश औसत से 35 फीसदी कम हुई है। कड़ी धूप के चलते सूखे से खेतों में दरारें आ गई हैं। सूख रही धान की फसल के लिए नहरों से पानी मिलना मुश्किल हो रहा है। बांदा के खेतों की सिंचाई के लिए गंगऊ, बरियारपुर और रनगवां बांध सहारा हैं।
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सिंचाई विभाग के मुताबिक गंगऊ में सिर्फ 755.19 एमसीएफटी पानी बचा है, यह सिर्फ आठ दिन नहर चलाने के लिए है। बरियारपुर बांध में सिर्फ 140 एमसीएफटी पानी है। इसे गर्मी में नहरों में छोड़ा जाएगा। इस पानी से सिर्फ सप्ताह भर बमुश्किल नहर चल सकेगी।

उधर, रनगवां बांध में  इस समय 662 एमसीएफटी (11 फीसदी) पानी है। इसमें सिर्फ 350 एमसीएफटी पानी यूपी की नहरों को मिलेगा। बाकी पानी मध्य प्रदेश के किसानों को मिलेगा।

चित्रकूट में रसिन बांध में सिर्फ 139 एमसीएफटी (40 फीसदी) पानी है। ओहन में 10, बरुवा में 7 और गुंता बांध में 12 फीसदी पानी बचा है।

महोबा जनपद में अर्जुन बांध में 58.45 मिलियन घन मीटर (11 प्रतिशत), चंद्रावल में 30.86 मिलियन घन मीटर (15 प्रतिशत), कबरई में मात्र 11.94 मिलियन घन मीटर , मझगवां में 25.92 मिलियन घन मीटर (मात्र 2 प्रतिशत) और उर्मिल बांध में 111.50 मिलियन घन मीटर (11 प्रतिशत) पानी बचा है। हमीरपुर जिले में मौदहा बांध में 179 लाख घन मीटर (6 प्रतिशत) पानी रवी की सिंचाई के लिए उपलब्ध है।

बांधों में पानी का स्टाक सीमित है। कोशिश है कि धान की फसल को सूखने से बचाया जाए। इसके लिए साप्ताहिक रोस्टर बनाया गया है। किसान पानी का दुरुपयोग न करें, ताकि सभी को सिंचाई के लिए पानी मुहैया हो जाए।
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                              -योगेश कुमार रावल, अधिशाषी अभियंता,  सिंचाई प्रखंड तृतीय।
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