बांदा। मेडिकल कॉलेज के एनेस्थीसिया विभागाध्यक्ष के 19 वर्षीय पुत्र का पीजीआई लखनऊ में वेंटिलेटर पर इलाज चल रहा है।
उसने शनिवार को शहर के आवास विकास स्थित किराये के मकान में मां की साड़ी से फंदा लगाकर जान देने की कोशिश की थी। समय रहते पिता की नजर पड़ने पर उसे नीचे उतारकर सीपीआर दिया गया था। इससे उसकी जान बच सकी।
बबेरू कस्बे के मिलाथु गांव निवासी डॉ. सुशील पटेल मेडिकल कॉलेज में एनेस्थीसिया विभागाध्यक्ष हैं। शनिवार सुबह मेडिकल कॉलेज जाने की तैयारी के दौरान बेटे आशीष को फंदे पर लटका देखा। परिजन की मदद से उसे नीचे उतारकर सीपीआर दिया और निजी अस्पताल में भर्ती कराया। हालत गंभीर होने पर चिकित्सक ने उसे पीजीआई लखनऊ रेफर कर दिया, जहां उसका वेंटिलेटर पर उपचार चल रहा है।
डॉ. सुशील के मुताबिक, बेटे का 21 सितंबर को घोषित परीक्षा परिणाम में एमबीबीएस के लिए चयन हुआ था। काउंसिलिंग पूरी हो चुकी थी और 15 अक्तूबर को एम्स में प्रवेश लेना था। घर में किसी तरह की परेशानी नहीं थी। उसने यह कदम क्यों उठाया, इसकी जानकारी नहीं हो सकी है। सीओ सिटी सौरभ सिंह ने बताया कि परिजनों की ओर से कोई सूचना नहीं दी गई है।