बांदा। मंडल कारागार बांदा में बंद विचाराधीन बंदी नितीश पाल की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के मामले में पांच दिन बाद शनिवार को पोस्टमार्टम कराया गया। चिकित्सकों ने मृत्यु के कारण को स्पष्ट करने के लिए विसरा सुरक्षित रखा है।
अपहरण, दुष्कर्म व पॉक्सो एक्ट के मामले में निरुद्ध 20 वर्षीय नीतीश किशोरी को न्यायालय से जमानत मिल चुकी थी और उसकी रिहाई की प्रक्रिया चल रही थी। इसी दौरान सोमवार सुबह उसकी तबीयत अचानक बिगड़ गई। उसे पहले जिला अस्पताल और बाद में गंभीर हालत में कानपुर तथा फिर लखनऊ रेफर किया गया, जहां उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई थी। मृतक के परिजनों ने जेल कर्मियों पर मारपीट का आरोप लगाते हुए उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। वहीं जेल प्रशासन का कहना है कि सीसीटीवी फुटेज में बंदी के साथ किसी प्रकार की मारपीट नहीं दिखी है। मामले की जांच के लिए गठित तीन सदस्यीय न्यायिक टीम अपनी रिपोर्ट तैयार कर रही है। पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया। अब सभी की नजर पोस्टमार्टम और विसरा जांच रिपोर्ट पर टिकी है, जिससे मौत के वास्तविक कारणों का खुलासा हो सकेगा।