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नेपाल में गूंजा बुंदेलखंड के बकस्वाहा जंगल का मुद्दा

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The issue of Bakswaha forest of Bundelkhand echoed in Nepal. - फोटो : BANDA
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बांदा। बुंदेलखंड के बकस्वाहा जंगल का मुद्दा देश की सीमाएं लांघकर अन्य देशों में भी गूंजने लगा है। ताजी बानगी नेपाल है। यहां आयोजित अंतरराष्ट्रीय पर्यावरण योद्धा सम्मान समारोह में बकस्वाहा की भी चर्चा हुई। बकस्वाहा आंदोलन से जुड़े पर्यावरण पैरोकार राजेश यादव को नेपाल के मंच पर सम्मानित भी किया गया। पौधरोपण भी हुआ।
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नेपाल में गौतम बुद्ध की जन्मस्थली लुंबिनी शहर में शनिवार व रविवार (27 व 28 नवंबर) को अंतरराष्ट्रीय पर्यावरण योद्धा सम्मान-2021 का आयोजन हुआ। इसमें भारत, नेपाल, भूटान, वर्मा, श्रीलंका और बंगलादेश के पर्यावरण योद्धा शामिल हुए।
उन्हें सम्मानित किया गया। इन्हीं में बकस्वाहा जंगल बचाने को चल रहे आंदोलन के सक्रिय कार्यकर्ता और पर्यावरण पैरोकार राजेश यादव को भी शामिल किया गया। राजेश ने बकस्वाहा जंगल को हीरा खनन के लिए सरकार द्वारा दिए जाने पर वहां 2 लाख 15 हजार 875 हरे पेड़ों के कटने का खतरा और इसे लेकर चल रहे देशव्यापी आंदोलन की विस्तार से चर्चा की। यह भी बताया कि मीडिया भी इस आंदोलन में मददगार है।
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समारोह का उद्घाटन नेपाल की राज्यमंत्री सुषमा यादव ने किया। आयोजन पीपल, नीम, तुलसी अभियान की पटना (बिहार) इकाई द्वारा किया गया। लुंबिनी के मेयर भी उपस्थित रहे। इसके पूर्व 27 नवंबर को परिसर में पौधरोपण किया गया। समारोह में जुटे पर्यावरण योद्धाओं ने बकस्वाहा जंगल की खुलकर वकालत की और हीरा खनन तथा पेड़ काटने का विरोध जताया। समारोह में डॉ. धर्मेंद्र कुमार ने भी सहयोग दिया।

The issue of Bakswaha forest of Bundelkhand echoed in Nepal.- फोटो : BANDA

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