शुक्रवार की शाम हुई भीषण ओलावृष्टि से आधे से ज्यादा जनपद में खड़ी फसलें चौपट हो गई हैं। किसानों में हाहाकार है। तमाम किसानों ने प्रशासन का ध्यान आकृष्ट कराने के लिए सड़कों पर जाम लगा प्रदर्शन किया।
नरैनी और अतर्रा तहसीलों में ओलों ने ज्यादा कहर ढाया है। नरैनी प्रतिनिधि के मुताबिक क्षेत्र के करीब आधा दर्जन गांवों पचोखर, पल्हरी, बहेरी, पिपरहरी, गोखिया और कलहरा समेत आदि गांवों में लगभग 20 मिनट तक ओले गिरे। खेत सफेद बर्फ से पट गए। पचोखर और पलरा ने गिरे ओलों का वजन 250 ग्राम तक बताया गया है।
गेहूं, अरहर, चना, लाही की फसलें जमींदोज हो गईं। किसान ओम प्रकाश गर्ग, राजाभइया, मइयादीन रैदास, राकेश गौतम, रामनरेश उपाध्यय, आशाराम त्रिपाठी आदि समेत बड़ी संख्या में किसानों ने शनिवार को सुबह नरैनी-अतर्रा मार्ग जाम कर दिया। किसान साथ में ओलों का ढेर भी लाए थे।
करीब डेढ़ घंटे बाद जाम स्थल पर आए एसडीएम सुधीर कुमार ने आश्वासन दिया कि पांच राजस्व कर्मी और पांच किसानों की संयुक्त टीम बनाकर फसल का सर्वे कराया जाएगा। एसडीएम ने फौरीतौर पर स्वीकारा की 70 फीसदी फसल बर्बाद हो गई जबकि किसानों का कहना था कि तमाम इलाकों में 100 फीसदी फसल चौपट हुई है।
एसडीएम के आश्वासन पर किसानों ने सुबह 10 बजे जाम खत्म किया। किसान यूनियन नेता श्रवण कुमार शर्मा, राकेश गौतम आदि ने कहा कि मुआवजे के लिए जरूरत पड़ी तो आंदोलन भी किया जाएगा।
अतर्रा प्रतिनिधि के मुताबिक हरी-भरी और लहलहाती फसल चंद मिनटों की दैवीय आपदा से ध्वस्त हो जाने पर किसानों के चेहरों पर हवाइयां उड़ रही हैं। सैकड़ों किसानों ने एसडीएम से फसल का सर्वे कराकर मुआवजा दिलाए जाने की मांग की है।
बदौसा प्रतिनिधि के मुताबिक, बदौसा, बरछा ब, दुबरिया, भुसासी, उदयपुर, चंदौर और तुर्रा गांव में तेज हवा के बीच गिरे ओलों ने फसल को मिट्टी में मिला दिया। बर्फ के पटे खेत कुछ देर बाद हुई बारिश से भर गए। खड़ी फसलें गिर गईं। चना, मसूर, सरसों, गेहूं, अलसी, अरहर के साथ बागवानी में टमाटर, बैगन, लौकी के पौधों को भी नुकसान पहुंचा।
बगीचे वाले किसानों का कहना है कि आम की बौर भी ओलों ने जमींदोज कर दी। पांच एकड़ बाग के मालिक उस्मान ने बताया कि ओलों की चोट से छोटे पेड़ों की शाखाएं टूटकर नीचे गिर गईं। किसान रत्नाकर सिंह, खालिक खां, एजाज खां ने कहा कि हजारों रुपये के खाद और बीज के साथ मेहनत भी मिट्टी में मिल गईं।
उधर जिलाधिकारी ने सुरेश कुमार ने कहा कि जनपद के सभी उप जिलाधिकारियों और तहसीलदारों को आज ही आदेश जारी किए हैं कि अपने-अपने क्षेत्रों में फसलों का सर्वे तत्काल कराएं।
फसलों को हुई क्षति का मूल्यांकन करते हुए अपनी रिपोर्ट प्राथमिकता के आधार पर तत्काल अपर जिलाधिकारी/प्रभारी अधिकारी दैवीय आपदा को प्रेषित करें ताकि शासन को सूचना भेजी जा सके। एडीएम को भी निर्देश दिए गए हैं कि वह अपने स्तर से सभी तहसीलों से रिपोर्ट लेकर शासन को भेजें।
ओलावृष्टि से दैवीय आपदा प्रभारी अनभिज्ञ
बांदा। जनपद में ओलावृष्टि की दैवीय आपदा से जनपद के दैवीय आपदा प्रभारी/एडीएम अनभिज्ञ हैं। ओलावृष्टि के करीब 24 घंटे बाद शनिवार को शाम उनसे प्रशासन द्वारा उठाए गए कदमों की जानकारी चाही गई तो उनका कहना था कि उन्होंने पूरा अखबार पढ़ा है उसमें कहीं ओलावृष्टि की खबर नहीं है।
गैरतलब है कि एडीएम डीएस पांडेय शनिवार को विकास भवन सभागार में एक कार्यक्रम में स्कूली बच्चों को सम्मानित करने में व्यस्त रहे।