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सरकार को चेताया ‘आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों को मिले राज्यकर्मियों का दर्जा’

Sun, 15 Mar 2015 11:16 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बांदा
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आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों ने केंद्र की मोदी सरकार को चेतावनी दी है कि उन्हें राज्य कर्मचारी का दर्जा नहीं मिला तो सीता और सावित्री के देश में सरकार का सर्वनाश हो जाएगा।
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बाल विकास पुष्टाहार बजट में कार्यकत्रियों और सहायिकाओं को मानदेय बढ़ाने की घोषणा नहीं की गई। रविवार को यहां निजामी पैलेस सभागार में आंगनबाड़ी कर्मचारी सम्मेलन में बारिश और बूंदाबांदी के बावजूद बड़ी संख्या में न सिर्फ बांदा बल्कि मंडल के अन्य जनपदों से भी आंगनबाड़ी कार्यकत्रियां शरीक हुईं।

महिलाओं के संगठन में प्रदेश अध्यक्ष रमेश प्रकाश राव भी इस अवसर पर उपस्थित थे। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि सीता और सावित्री के इस देश में जिसने भी महिलाओं के साथ अन्याय, शोषण और उत्पीड़न किया है, उसका सर्वनाश हुआ है।
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प्रदेश की चार लाख आंगनबाड़ी कर्मियों को राजकीय कर्मचारियों का दर्जा नहीं मिला तो मोदी सरकार भी यह हश्र होगा। आरोप लगाया कि पिछले 40 वर्षों से आंगनबाड़ियों को अल्प मानदेय देकर उनका शोषण किया जा रहा है। संघ की बांदा जिलाध्यक्ष नीलम वर्मा ने आंगनबाड़ी कर्मियों को एकजुट होने का आह्वान किया।

उन्होंने कहा कि चार दशकों से केंद्र और प्रदेश सरकारें उनके साथ अन्याय कर रही हैं। इसका मुंहतोड़ जवाब दें तभी राज्य कर्मचारी का दर्जा मिलेगा। सम्मेलन को प्रदेश संगठन मंत्री अभिषेक गुप्ता, जिला संरक्षक प्रदीप वर्मा, शहर अध्यक्ष किरन सेठी, बड़ोखर ब्लाक अध्यक्ष विमला देवी, बबेरू अध्यक्ष कौशिल्या देवी, तिंदवारी अध्यक्ष सुधा सिंह ने भी संबोधित किया।

वसूले गए पांच-पांच सौ रुपये
बांदा। एक ओर जहां सम्मेलन में आंगनबाड़ियों को अल्प मानदेय दिए जाने का रोना रोया जा रहा था वहीं सम्मेलन स्थल पर ही लगे स्टाल में आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों को 500-500 रुपये रजिस्ट्रेशन शुल्क जमा करना पड़ा। सम्मेलन में 1000 से ज्यादा कार्यकत्रियों के शामिल होने की बात कही गई।

कई महिला आंगनबाड़ी कार्यकत्री स्टाल लगाकर शुल्क वसूल रहीं थीं। इसकी बाकायदा रसीद दी जा रही थी। उधर, संघ जिलाध्यक्ष नीलम वर्मा ने रजिस्ट्रेशन शुल्क वसूलने की बात को यह कहकर गलत ठहरा दिया कि 3000 रुपये मानदेय पाने वाली आंगनबाड़ी 500 रुपये कहां से दे पाएगी ?
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जिलाध्यक्ष ने यह स्वीकारा कि सम्मेलन खर्च के लिए सहयोग राशि ली गई है। बमुश्किल 9-10 हजार रुपया ही जुटा है। यह पैसा सम्मेलन पर ही खर्च होगा।
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