बांदा। तहबाजारी में करोड़ों रुपये की अनियमितता मामले में शासन ने जिला पंचायत अध्यक्ष से स्पष्टीकरण मांगा है। नोटिस में कहा गया है कि यदि 15 दिनों में स्पष्टीकरण नहीं दिया गया तो एकतरफा कार्रवाई की जा सकती है। माना जाएगा कि आपको अपने पक्ष में कुछ नहीं कहना है। बता दें कि जनरेटर बाजार से कई गुना ज्यादा दर पर खरीदने और सगे-संबंधियों को ठेके देने के आरोप लगे थे। इसकी जांच महोबा डीएम ने की थी और रिपोर्ट शासन को भेजी थी।
जिला पंचायत अध्यक्ष सुनील सिंह पटेल के खिलाफ सदर विधायक प्रकाश द्विवेदी व जिला पंचायत अध्यक्षों ने मंडलायुक्त व शासन में शिकायत की थी। पांच फरवरी को मंडलायुक्त ने मामले की जांच कराई थी। इसके बाद शासन से मंडलायुक्त को जिलाधिकारी से जांच कराने के निर्देश दिए गए थे। इस पर महोबा डीएम से जांच कराई गई थी। महोबा डीएम ने 23 जून को जांच आख्या शासन को भेजी थी। 20 बिंदुओं की जांच 11, 16 व 16 में वित्तीय अनियमितता की पुष्टि की गई है। विशेष सचिव राजेश कुमार त्यागी ने सोमवार को जिला पंचायत अध्यक्ष सुनील पटेल को नोटिस भेजा है।
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इन तीन बिंदुओं पर सही पाए गए आरोप
बांदा। जिला पंचायत में वित्तीय वर्ष 2021-22 में जिला पंचायत खनिज परिवहन शुल्क अधिकतम प्रति गाड़ी दो सौ रुपये था। वित्तीय वर्ष के बीच में इसे दो सौ से बढ़ाकर चार सौ रुपये कर दिया गया। बोर्ड बैठक में बताया गया कि यह शुल्क राजस्व में वृद्धि के लिए हुआ है। ठेकेदारों ने शुल्क चार सौ रुपये कर दिया, पर जिला पंचायत के राजस्व में एक रुपये भी जमा नहीं हुए। जिला पंचायत अध्यक्ष, अपर मुख्य अधिकारी, वित्तीय परामर्शदाता ने ठेकेदार के साथ मिलकर सीधा करोड़ों रुपये का गबन किया। डीएम महोबा ने इस अनियमितता की जांच में पुष्टि की है। उधर, जिला पंचायत में अध्यक्ष व कुछ सजातीय जिला पंचायतस दस्यों के जरिए चचेरे भाई, पिता व नजदीकी रिश्तेदारों के नाम पर ठेकेदारी की गई, जो नियम विरुद्ध है। जिला पंचायत सदस्य मीरा पटेल के पिता रामऔतार पटेल यहां पंजीकृत ठेकेदार हैं। डीएम ने इस शिकायत में भी अध्यक्ष को दोषी बताया है। इसके अलावा जनरेटर व फर्नीचर खरीद में भी जिला पंचायत अध्यक्ष व अपर मुख्य अधिकारी को दोषी बताया गया है। कहा है कि 40केवीए जनरेटर बाजार मूल्य से कई गुना दर पर करीब 18.90 लाख रुपये का खरीदा गया। जबकि वर्तमान में इस जनरेट का मूल्य साढ़े सात लाख रुपये है। इसका बिल 15 अक्टूबर 2025 को लगायागया। जिला पंचायत अध्यक्ष ने 25 अक्टूबर को भुगतान स्वीकृत कर दिया। इसका चेक भी बनाया गया। हालांकि शिकायत होने पर भुगतान रोक दिया गया था।
कहते हैं अध्यक्ष
-जिला पंचायत में जो भी हमारे ऊपर आरोप लगे हैं, वह निराधार हैं। हमने तो खुद कहा था कि वर्ष 2018 से इन बिंदुओं की जांच कराई जाए। तत्कालीन मंडलायुक्त ने कमेटी भी गठित की, लेकिन वह जांच दबा दी गई।
-सुनील सिंह पटेल, अध्यक्ष जिला पंचायत, बांदा