बांदा। धान खरीद का पहला दिन सन्नाटे में बीता। कई केंद्र खुले ही नहीं। वहां सिर्फ बैनर टंगे नजर आए। कुछ केंद्र खुले तो उनमें सफाई आदि चलती रही। बंद केंद्रों के बारे में अफसरों की दलील थी कि अभी धान की फसल खेतों में खड़ी है। जल्द ही केंद्र पूरी तरह तैयार हो जाएंगे।
शासन के निर्देश पर 1 नवंबर से धान की सरकारी खरीद शुरू हो गई है। अभिलेखों में खरीद केंद्र खुल गए, लेकिन धरातल पर पहले दिन ही यह आदेश बेअसर रहा। ग्रामीण क्षेत्रों के केंद्रों की बात तो दरकिनार मंडल मुख्यालय बांदा शहर के केंद्र भी पूरी तरह सक्रिय नजर नहीं आए। मुख्यालय के मंडी समिति परिसर में स्थित खाद्य विभाग के खरीद केंद्र में पहला दिन सफाई में बीता। यहीं स्थित एग्रो, पीसीएफ व कर्मचारी कल्याण निगम के केंद्रो में ताले पड़े रहे। महुआ, बिलगांव, खुरहंड के खरीद केंद्रों में भी न ताला खुला, न बैनर लगे। कमोवेश यही स्थिति जनपद के अन्य केंद्रों की भी रही। केंद्र प्रभारियों के मोबाइल स्विच ऑफ रहने से उनसे संपर्क नहीं हो पाया।
बांदा व चित्रकूट में खरीद केंद्र की पहले दिन स्थिति
जनपद लक्ष्य केंद्र पहले दिन खरीद
बांदा 72,650 39 00
चित्रकूट 8000 12 00
योग 80,650 51 00
फसल खेत में, केंद्र में कैसे आए?
बांदा। धान खरीद का पहला दिन शून्य स्थिति पर गुजरने की बाबत जिला खाद्य एवं विपणन अधिकारी गोविंद उपाध्याय का कहना है कि धान की फसल अभी खेतों में खड़ी है। इस माह के अंत तक यह तैयार होगी तभी केंद्रों में आएगी। उन्होंने कहा कि वह धान खरीद केंद्रों का औचक निरीक्षक करेंगे। बंद पाए जाने पर प्रभारियों के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी। एक-दो दिन में व्यवस्थाएं ठीक हो जाएंगी। संवाद
बारिश ने बिगाड़ा धान का खेल
बांदा। धान खरीद की शुरूआत नीरस होने पर दलील दी जा रही है कि चित्रकूटधाम मंडल में इस वर्ष बारिश ज्यादा और चालू माह तक हुई है। इससे धान फसल एक माह पिछड़ गई। लामा गांव के राजेंद्र निगम का कहना है कि बारिश के कारण धान की बेड़ सितंबर में लगी है। यह 15 से 20 दिन पिछड़ गई है। घुरौंडा गांव के रामकिशोर द्विवेदी ने कहा कि आमतौर पर अक्तूबर के आखिरी हफ्ते में धान तैयार हो जाता था। लेकिन बारिश ने यह शेड्यूल बिगाड़ दिया। अब बारिश थमने के बाद बादल पीछा नहीं छोड़ रहे। जबकि धान की फसल को खुले मौसम की दरकार है।