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Banda News: सूख गईं केन नदी किनारे की बारियां

Thu, 30 Apr 2026 12:18 AM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
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फोटो - 18 केन नदी किनारे सूखी पड़ी सब्जी की बारियां। संवाद
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बांदा। अप्रैल माह में ही पारा 47 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंचने के साथ ही जनपद में भीषण गर्मी का प्रकोप देखने को मिल रहा है। इसका सीधा असर केन नदी किनारे लगी सब्जी की बारियों पर पड़ा है। जहां हरी सब्जियों की बेलें और पौधे सूखने लगे हैं। इस अप्रत्याशित गर्मी ने न केवल किसानों की चिंता बढ़ा दी है, बल्कि आम उपभोक्ताओं के लिए भी हरी सब्जियों की थाली महंगी हो गई है।
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गर्मी के कारण उत्पादन में आई कमी के चलते लौकी, ककड़ी, खीरा, करेला, तरोई और भिंडी जैसी हरी सब्जियों के दामों में दोगुना वृद्धि हुई है। पहले जो सब्जियां 40-60 रुपये प्रति किलो मिल रही थीं, वे अब 60-80 रुपये प्रति किलो तक बिक रही हैं। यह स्थिति तब है जब अभी मई और जून माह की भीषण गर्मी आनी बाकी है, जिससे सब्जियों का मिलना और भी मुश्किल हो सकता है। केन नदी किनारे की सब्जी की बारियां निषाद समुदाय के लगभग दो दर्जन परिवारों के लिए आय का मुख्य स्रोत हैं। ये परिवार फरवरी से जून तक इन बारियों से सब्जियां उगाकर अपनी आजीविका चलाते हैं। इस बार अप्रैल माह से ही पौधे सूखने लगे हैं, जिससे उत्पादकों के चेहरे पर चिंता की लकीरें साफ दिख रही हैं। उनका कहना है कि अगर बारियां सूख गईं तो भरण-पोषण की समस्या खड़ी हो जाएगी। वहीं, सब्जियों के बढ़े दामों से शहर के लोगों की भी परेशानी बढ़ गई है। अप्रैल माह में ही दामों में आई इस तेजी से लोग चिंतित हैं कि मई और जून में जब गर्मी अपने चरम पर होगी, तब हरी सब्जियां मिलना और भी मुश्किल हो जाएगा।



40 डिग्री से अधिक तापमान खतरे की घंटी



40 डिग्री से अधिक तापमान बढ़ने से पौधों की जड़ों से नमी तेजी से कम होने लगती है। पौधे तनाव की स्थिति में आ जाते हैं और बढ़वार थम जाती है। पानी की कमी से पौधे सूखने लगते हैं। ऐसे में इंटरवल इरिगेशन तकनीक से सिंचाई की जाए।
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नवनीत



बागवानी विशेषज्ञ



उद्यान विभाग, बांदा
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