बांदा/करतल। बच्चों के प्रति पिता का प्रेम जंगल के जानवरों में भी जीवंत रूप में नजर आ रहा है। बुंदेलखंड का पन्ना टाइगर रिजर्व पार्क इसका ताजा उदाहरण है। दो महीने पहले यहां अपने चार मासूम शावकों को छोड़कर चल बसी बाघिन के बच्चों की परवरिश का जिम्मा अब बाघिन के नर साथी बाघ ने संभाल लिया है। वह शिकार करके उन्हें भोजन परोस रहा है। पिता की छत्रछाया में शावक स्वस्थ और चंगे हैं।
बुंदेलखंड के पन्ना टाइगर रिजर्व पार्क बाघों के लिए मशहूर है। यहां मई माह में बाघिन (पी-213) की मौत हो गई थी। उसके चार शावक उन दिनों मात्र तीन या चार महीने के ही थे। मां की मौत के बाद कई दिन तक यह शावक नजर नहीं आए। इस पर पन्ना टाइगर रिजर्व पार्क प्रबंधन को खासी चिंता हुई। पार्क प्रशासन ने सभी शावकों की तलाश शुरू कराई। कुछ ही दिन बाद यह शावक अपने अड्डे में सही सलामत खेलते नजर आए। मां को खो बैठे शावकों पर नर बाघ (पी-243) मेहरबान हो गया। वह पूरी तरह इन शावकों का ख्याल रख रहा है।
रिजर्व पार्क के सूत्र बताते हैं कि हाल ही में बाघ ने गाय का शिकार किया, लेकिन खाया नहीं। पन्ना टाइगर रिजर्व पार्क के कर्मियों के मुताबिक, बाघ ने यह शिकार शावकों के इलाके में उन्हीं के लिए किया था। इसके पूर्व भी बाघ ने शिकार करके शावकों के साथ खाया था। यह नर बाघ ही इन शावकों का पिता बताया गया है। इस बाबत पन्ना टाइगर रिजर्व के क्षेत्रीय संचालक उत्तम कुमार शर्मा ने भी बाघ द्वारा शावकों की परवरिश की पुष्टि की है। उन्होंने कहा कि यह सुखद बात है कि नर बाघ शावकों के लिए उनके खाने का इंतजाम लगातार कर रहा है। रिजर्व पार्क कर्मी बाघ और शावकों पर लगातार नजर रख रहे हैं।
दूसरी बाघिन को नहीं बनाया साथी
शावकों का पालन पोषण कर रहा नर बाघ मृतक बाघिन को भी बहुत प्यार करता था। पन्ना टाइगर रिजर्व पार्क के कर्मचारी बताते हैं कि बाघिन के शव को पोस्टमार्टम के बाद जलाया गया था। अगले दिन नर बाघ चिता स्थल के आसपास मंडराता भी मिला। शावक भी उसी इलाके में थे। यह भी बताया जा रहा कि बाघिन की मौत के बाद अब तक बीते दो माह में नर बाघ ने किसी दूसरी बाघिन को अपना साथी तक नहीं चुना है।
आठ माह के शावक नहीं कर पाते शिकार
शावकों की उम्र अब लगभग आठ माह है। वह पिता बाघ द्वारा किए गए शिकार को खा लेते हैं, लेकिन अभी खुद शिकार नहीं कर पाते। जानकार बताते हैं कि 12-13 महीने की उम्र पूरी होने के बाद ही शावक अपना शिकार शुरू करते हैं। इस बाबत पन्ना टाइगर रिजर्व पार्क के क्षेत्रीय संचालक उत्तम कुमार शर्मा ने बताया कि शावकों के वयस्क और आत्मनिर्भर हो जाने तक उन पर पूरी नजर रखी जा रही है।
बाघ को पहनाया रेडियो कॉलर
पन्ना टाइगर रिजर्व सूत्रों के मुताबिक, चारों शावक स्वस्थ और चंगे हैं। इनका वजन 50 से 60 किलो के बीच है। इनकी देखभाल कर रहे नर बाघ की सुरक्षा पर पन्ना टाइगर रिजर्व पार्क का प्रशासन पूरी तरह गंभीर है। बाघ के गले में रेडियो कॉलर लगा दिया गया है, ताकि उसकी लोकेशन मिलती रहे। मृतक बाघिन के भी कॉलर लगाया गया था।
पार्क को 1994 में मिली थी मान्यता
पन्ना टाइगर रिजर्व पार्क बाघों के लिए देश और दुनिया में मशहूर है। यह भारत का 22वां और मध्य प्रदेश का 5वां अभ्यारण्य है। बुंदेलखंड में यह इकलौता है। पन्ना राष्ट्रीय उद्यान की स्थापना 1981 में हुई थी। वर्ष 1994 में भारत सरकार ने इसे टाइगर रिजर्व के रूप में मान्यता दी थी। इस पार्क में मुख्य रूप से बाघ हैं। इनकी संख्या मौजूदा में लगभग 60 बताई गई है। पक्षियों में यहां गिद्ध संरक्षित हैं।
पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र है पार्क
लगभग 542 वर्ग किलोमीटर में फैला पन्ना रिजर्व टाइगर पार्क प्राकृतिक रूप से भी बेहद खूबसूरत और दर्शनीय है। यहां दूर-दूर से पर्यटक आते हैं। कोरोना काल में यह पर्यटकों के लिए बंद है। इसकी सीमा से जुड़े क्षेत्रों में लगभग आधा सैकड़ा गांव और मजरे हैं। यह बफर क्षेत्र भी कहलाता है।