बारिश और ओला से चौपट हो गई फसल देखकर खेत में गिरकर कोमा में चले गए किसान को बचाने में प्रशासन ने कोई दिलचस्पी नहीं ली। एक पखवारे तक बेहोश अवस्था में जिंदगी और मौत से जूझते रहे किसान ने शनिवार को शाम दम तोड़ दिया। अब उसका अंतिम संस्कार खेत के उसी स्थल पर होगा जहां वह गिरकर बेहोश हुआ था।
जसपुरा गांव का गोपाल सोनकर 14 बीघा जमीन का काश्तकार था। 12 मार्च को भीषण ओलावृष्टि से ध्वस्त हो गई फसल देखते ही वह खेत में चक्कर खाकर गिर पड़ा और बेहोश होकर कोमा में चला गया। निर्धन परिवार के इस किसान के इकलौते पुत्र ने 60 हजार रुपये कर्ज देकर पिता को कानपुर पहुंचाया।
वहां दो लाख रुपये का खर्च बताए जाने पर पुत्र बेहोश हालत में ही पिता को घर ले आया। साथ ही पुत्र बिंद किशोर ने 24 मार्च को जिला मुख्यालय आकर डीएम से लिखित फरियाद करते हुए इलाज के लिए आर्थिक सहायता मांगी थी। डीएम ने एसडीएम को लिख दिया। 26 को एसडीएम किसान के घर पहुंचे और पूछताछ की रस्म अदायगी करके वापस लौट आए।
फिर किसी ने सुध नहीं ली। 25 मार्च को ‘अमर उजाला’ ने इस किसान की विस्तृत खबर छापी। इस पर अगले ही दिन क्षेत्रीय विधायक दलजीत सिंह ने किसान को इलाज निधि से कराने का भरोसा दिलाया और इसके लिए आवश्यक दस्तावेज जुटाने को कहा।
पुत्र बिंद किशोर बेहोश पिता की लगातार देखरेख करता रहा लेकिन शनिवार की शाम इस किसान की आखिरी शाम बन गई। करीब 7 बजे घर पर ही अंतिम सांस ली। डीएम से फरियाद के चार दिनों बाद ही प्रशासन की तरफ से कोई मदद नहीं आई और किसान को मौत आ गई।
ग्राम प्रधान तोप सिंह ने बताया कि मृतक के अंतिम संस्कार में लकड़ी आदि की वह व्यवस्था कर रहे हैं। रविवार को सुबह 10 बजे मृतक किसान की चिता खेत में उसी स्थान पर बनेंगी जहां 12 मार्च को वह गिरकर बेहोश हुआ था।
कर्जदार किसान की सदमे से जान गई
बबेरू/बांदा। कमासिन क्षेत्र के अमलोखर गांव में एक और किसान फसल के सदमे का शिकार हो गया। 48 वर्षीय रामखेलावन पुत्र बदलुआ शुक्रवार को शाम खेत गया था। वापस आते ही उसकी हालत बिगड़ गई। पेट में भी पीड़ा शुरू हो गई। उसे कमासिन पीएचसी लाया गया। यहां से जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया, लेकिन रास्ते में ही मौत हो गई।
6 बीघा जमीन के काश्तकार रहे रामखेवालन पर इलाहाबाद यूपी ग्रामीण बैंक (पछौहां ग्राम ब्रांच) का 50 हजार रुपया कर्ज था। इसके अलावा उस पर 70 हजार रुपये बिजली बिल भी बकाया था। चार पुत्रियां शादी के लिए बाकी हैं। दो नाबालिग पुत्र हैं। विधवा सुमित्रा सहित इन छह बच्चों के घर में कोहराम मचा हुआ है।
एसडीएम विनय कुमार पाठक ने कहा है कि नायब तहसीलदार विनय कुमार को जांच के लिए भेजा गया है। एक अन्य घटना में रगौली (करतल) निवासी किसान संदीप (30) पुत्र झल्ला ने शनिवार को घर पर जहर खा लिया।
उसने जिला अस्पताल में बताया कि उसके पास तीन बीघे जमीन थी। दैवीय आपदा में उसके खेतों की फसल नष्ट हो गई है। इससे निराश होकर उसने यह कदम उठाया। ब्यूरो
छह माह तक आधा वेतन दें विधायक
भाजपा किसान मोर्चा जिला प्रभारी सूर्यपाल सिंह चौहान ने मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर विधायकों की वेतन बढ़ोत्तरी का विरोध किया है। कहा, दैवीय आपदा से परेशान किसान आत्महत्या कर रहे हैं। जन प्रतिनिधि मदद के बजाए जेबें भर रहे हैं। मांग की है कि प्रदेश सरकार फैसले पर पुनर्विचार करे। साथ ही सभी विधायक अगले छह माह का आधा वेतन किसानों के लिए आपदा राहत कोष में जमा करें। किसान ट्रस्ट और आयोग गठित हो।