दिन-रात जगह-जगह भारी पैमाने पर जलधारा में हो रहे अवैध खनन से बुंदेलखंड की महत्वपूर्ण नदी केन का वजूद खतरे में है। दिन-ब-दिन सिकुड़ रही जलधारा और घट रहे जलस्तर से ये आसार साफ नजर आ रहे हैं। बांदा और हमीरपुर के अलावा सीमावर्ती मध्य प्रदेश के कई इलाकों के लिए यह नदी जीवनदायिनी है। पेयजल योजनाओं के साथ खेतों की सिंचाई का प्रमुख जरिया है। ताजे आंकड़ों के मुताबिक नदी का जल स्तर हर साल कम से कम 5 सेंटीमीटर घट रहा है। पांच साल में 25 सेंटीमीटर की कमी आ चुकी है।
केंद्रीय जल आयोग ने भूरागढ़ रेलवे पुल के पास केन नदी पर जल स्तर मापने का पैमाना बना रखा है। आयोग के मुताबिक वर्ष 2015 में इस पैमाने का नदी का जलस्तर 4.75 मीटर था। जो इस वर्ष घटकर 4.45 मीटर हो गया है। उधर, केन नदी पर बने बरियारपुर वियर की ताजा हालत यह है कि इस बांध में पानी डेड स्टोर यानी तलहटी पर है। इसी वियर से पानी डिस्चार्ज होकर बांदा की ओर आता है। सिंचाई प्रखंड तृतीय के अवर अभियंता भीखम सिंह ने बताया कि वियर में पानी न होने से केन नदी में डिस्चार्ज नहीं हो रहा है। उधर, इन परिस्थितियों में जगह-जगह केन नदी की जलधारा में भारी मशीनों से बालू खनन ने नदी के बहाव पर ब्रेक लगाना शुरू कर दिया है। गहराई बढ़ने से पर्याप्त पानी आगे नहीं बढ़ पा रहा। कई स्थानों पर तो यह नदी छुलछुल धारा बनकर रह गई है।
मई-जून में बढ़ेगा और संकट
बांदा। केन नदी से चित्रकूटधाम मंडल जल संस्थान एक दर्जन से ज्यादा नगरीय व ग्रामीण पेयजल योजनाएं संचालित कर रहा है। बांदा शहर के बड़े हिस्से को भी नदी से जलापूर्ति होती है। जलस्तर घटने से जल संस्थान के पानी में दो एमएलडी की कमी आ गई है। नदी से 10 एमएलडी पानी लिया जा रहा था, लेकिन बमुश्किल 8 एमएलडी ही पानी मिल पा रहा है। जल संस्थान महाप्रबंधक राम सिंह ने बताया कि केन नदी की जलधारा सिकुड़ जाने से इंटेकवेल को पानी पहुंचाने में काफी जद्दोजेहद करनी पड़ रही है। आने वाले दिनों में स्थिति और बिगड़ सकती है। मई, जून माह में स्थिति और भी भयावह हो सकती है।
साल-दर-साल केन नदी का घटता जलस्तर
वर्ष जलस्तर (मीटर में)
2015 4.75
2016 4.73
2017 4.69
2018 4.53
2019 4.45
250 किलोमीटर दूरी तय करती है केन
बांदा। केन नदी का उद्गम जबलपुर (एमपी) के पहाड़ों से हुआ है। यूपी-एमपी के तमाम इलाकों से होती हुई यह बांदा जनपद के चिल्ला में यमुना नदी में आ मिली है। इसकी कुल दूरी लगभग 250 किलोमीटर है। इसकी सहायक नदी उर्मिल है। केन में पानी कम होने के साथ ही उर्मिल का अस्तित्व भी खतरे में है।
केन से होती है 95 हजार हेक्टेयर में सिंचाई
बांदा। केन नदी से काफी बड़े स्तर पर सिंचाई होती है। सिंचाई विभाग द्वारा संचालित लगभग 1100 किलोमीटर लंबी छोटी-बड़ी नहरों को इसी नदी से पानी मिलता है। बांदा जनपद में लगभग 95 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल की सिंचाई केन नहरों से होती है। मध्य प्रदेश के कुछ इलाके भी केन से ही पानी लेते हैं। केन का पानी कम होने से सिंचाई भी प्रभावित होती है।
खनन और बारिश की कमी है कारण
बांदा। केन नदी में पानी के बढ़ते और मंडराते संकट पर केंद्रीय जल आयोग के स्थानीय सहायक अभियंता अमित कुर्डिया का कहना है कि बारिश में कमी से बांध पूरे नहीं भर पाते। नदियों को भी भरपूर पानी नहीं मिल पाता। दूसरी तरफ जल धारा के सिकुड़ने और पानी के आगे न बढ़ने की वजह नदी के अंदर पानी में बड़े पैमाने पर हो रहा बालू खनन भी है।