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बकस्वाहा बचाने की गूंज बांदा में भी गूंजी

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बांदा। बुंदेलखंड के बकस्वाहा जंगल को बचाने की गूंज सोमवार को चित्रकूटधाम मंडल के मुख्यालय बांदा में भी गूंजी। पीपल, नीम, तुलसी अभियान के तत्वावधान में शुरू हुई साइकिल यात्रा यहां मुख्यालय पहुंची।
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बुंदेलखंड नव निर्माण सेना सहित पर्यावरण प्रेमियों ने साइकिल यात्रियों की अगुवानी की। बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के छात्र और पीपल, नीम, तुलसी अभियान के सदस्य सिद्धार्थ झा तथा राजीव कुमार 24 जुलाई को बिहार प्रांत के मुजफ्फरपुर से साइकिलों से बकस्वाहा जंगल बचाने के लिए रवाना हुए हैं।
कई सौ किलोमीटर का सफर तय करते हुए सरांय, पटना, दानापुर, बिहटा, डुमरावं, बक्सर, चौंसा, चौंदली, बनारस, इलाहाबाद और चित्रकूट होते हुए सोमवार को सुबह 10 बजे साइकिल यात्री बांदा पहुंचे।
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शहर के स्वतंत्रता स्मारक अशोक लाट के पास बुंदेलखंड नव निर्माण सेना ने साइकिल यात्रियों की अगुवानी की। उन्हें नीम और पीपल की माला पहनाकर मिठाई खिलाई। जिलाध्यक्ष राहुल कुमार अवस्थी, महासचिव आशुतोष गुप्ता, कार्यालय प्रभारी अंजन, सिराज चिश्ती, आनंद सैनी, संतोष सिंह तोमर, शफीक खां, वकील खां, संदीप राज साहू और शैलेष कुमार आदि मौजूद रहे।
साइकिल यात्रियों ने कहा कि बकस्वाहा जंगल मुद्दा हजारों आदिवासियों की रोजी रोटी और जीवन से जुड़ा है। जंगल को हीरा खदान को देने पर पूरे देश में विरोध हो रहा है। केंद्र और राज्य सरकार हठधर्मी पर अड़ी हैं, लेकिन पर्यावरण प्रेमी खामोश नहीं बैठेंगे।
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