बांदा। संक्रमण का शिकार होकर 14 दिन तक अस्पताल और घर में आइसोलेट रहने के बाद स्वस्थ हो गए राजकीय मेडिकल कालेज के दो असिस्टेंट प्रोफेसर ने आइसोलेशन के दौरान अपना तजुर्बा आम लोगों से साझा किया है। उनका कहना है कि रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत रखकर कुछ सावधानियां बरतते हुए कोरोना को हराया जा सकता है। आइसोलेशन में रहने के दौरान सकारात्मक रवैया रखने की सलाह दी।
स्वास्थ्य कर्मियों को प्रशिक्षण देने के दौरान 2 जुलाई को राजकीय मेडिकल कालेज के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. शैलेंद्र मिश्रा (मानसिक विभाग) और डॉ. अभिषेक राज (फिजीशियन, मेडिसिन विभाग) संक्रमित हो गए थे। उनकी पॉजिटिव रिपोर्ट आई थी। कुछ दिन घर में फिर आइसोलेशन वार्ड में रहे।
13 जुलाई को तीसरी रिपोर्ट भी निगेटिव आने के बाद वे स्वस्थ होकर डिस्चार्ज हो गए। उन्होंने कहा कि कोविड-19 के लक्षण आम सर्दी और जुकाम से काफी जटिल हो सकते हैं। इसके लिए रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत रखनी चाहिए। आइसोलेशन के दौरान सकारात्मक रवैया अपनाते हुए पसंदीदा किताब पढे़ं या संगीत सुनें, जिससे मानसिक तनाव न हो। उनका यह भी कहना है कि कोरोना संक्रमितों का तिरस्कार करके उनसे दूरी न बनाएं, बल्कि उनका सम्मान और सहयोग करें। इससे मरीज को बीमारी से लड़ने की ताकत मिलेगी।
डॉ. अभिषेक राज का कहना है कि उनकी पत्नी और पिता भी डाक्टर हैं। संक्रमित होने पर उन्हें घबराहट नहीं हुई। संक्रमण को मात दे चुके मरीजों से किसी तरह का संक्रमण नहीं फैलता। उनसे किसी तरह का भेदभाव नहीं करना चाहिए। संक्रमित के अलावा आसपास के लोग भी डर जाते हैं।
मरीज से दूरी बना लेते हैं, जबकि संक्रमित के संपर्क में आए लोगों का ही टेस्ट करवाया जाता है। पॉजिटिव होने पर क्वारंटीन किया जाता है। अफवाहों से बचें। पौष्टिक भोजन लेने। सफाई का ध्यान रखने। मॉस्क और आपसी दूरी तथा बार-बार हाथ धोने की आदत संक्रमण से बचाव का हथियार है।