बांदा। जिला पंचायत में तहबाजारी में ही अनियमितता नहीं हुई, बल्कि जनरेटर खरीद में भी अनियमितता की गई। बाजार से दोगुने से अधिक 18 लाख रुपये का जनरेटर खरीदकर भुगतान के लिए बिल लगाया। हालांकि जिला पंचायत सदस्यों की शिकायतों और विरोध के बाद भुगतान रोक दिया गया। इसके लिए तीन सदस्यीय जांच समिति से आख्या मांगी गई है। हालांकि जिला पंचायत अध्यक्ष का कहना है कि उन्होंने खुद इसका विरोध किया और भुगतान रोकने तथा जांच की सिफारिश की थी।
जिला पंचायत में खनिज परिवहन शुल्क (तहबाजारी) में 6.21 करोड़ रुपये की गड़बड़ी का मामला सामने आया था। जिला पंचायत सदस्यों की शिकायत पर मंडलायुक्त ने बांदा डीएम को जांच सौंपी थी। जिला पंचायत अध्यक्ष सुनील सिंह पटेल ने इसका विरोध किया था। उन्होंने कहा था कि किसी दूसरे जिले के सक्षम अधिकारी से मामले की जांच कराने की मांग उठाई थी।
इस पर मंडलायुक्त ने महोबा जिलाधिकारी को जांच सौंपी थी। सप्ताह भर पहले उन्होंने जांच रिपोर्ट मंडलायुक्त को सौंपी थी, जिसमें अध्यक्ष सुनील पटेल दोषी पाए गए थे। मंडलायुक्त अजीत कुमार सिंह ने शासन को यह रिपोर्ट भेज दी है। अब शासन की ओर से कार्रवाई का इंतजार है। उधर, जिला पंचायत में जनरेटर खरीद में भी घपला किया गया है।
तत्कालीन अपर मुख्य अधिकारी की संस्तुति पर जिला पंचायत के लिए जनरेटर खरीदा गया। बताया जाता है कि इसकी कीमत बाजार में करीब साढ़े सात लाख रुपये है, लेकिन जिला पंचायत ने इसे 18 लाख रुपये में खरीदा। दो माह पहले जिला पंचायत सदस्यों ने इसकी शिकायत की थी और विरोध भी जताया था।
इसके बाद जिला पंचायत अध्यक्ष सुनील पटेल ने जनरेटर के भुगतान को रोकने की संस्तुति की और उनका दावा है कि मंडलायुक्त व शासन को पत्र भेजकर उन्होंने बाजार से करीब दोगुना से ज्यादा भुगतान किए जाने की जांच कराने की मांग की थी। इसके बाद मंडलायुक्त ने इस पर भी तीन सदस्यीय जांच समिति गठित की है। हालांकि अभी इसकी पुष्टि नहीं हो सकी है।
तहबाजारी में इस तरह की गई अनियमितता
जिला पंचायत सदस्य सुजाता राजपूत, नीरज प्रजापति व अरुण पटेल ने पिछले वर्ष 26 अक्तूबर जिला पंचायत में खनिज परिवहन शुल्क के नाम पर गड़बड़ी की तत्कालीन मंडलायुक्त बालकृष्ण त्रिपाठी से शिकायत की थी। सदस्यों ने आरोप लगाया था कि जिला पंचायत की ओर से वर्ष 2021-22 के लिए खनिज परिवहन करने वाले ट्रकों से वसूली के लिए 8.21 करोड़ रुपये का टेंडर किया गया था। शुल्क 200 रुपये के स्थान पर 400 रुपये कर दिया गया था। उसके बाद वर्ष 2022-23 में 2.7 करोड़ रुपये में ही टेंडर जारी कर दिए गए। इस पूरे प्रकरण में 6.21 करोड़ रुपये की गड़बड़ी कर रकम का गबन किया गया है।
वर्जन-
-जनरेटर खरीद में ज्यादा भुगतान का मामला हमारे सामने आया था। इसका हमने विरोध किया। खुद उच्चाधिकारियों को पत्र भेजकर जांच कराने व भुगतान रोकने की सिफारिश की थी।-सुनील सिंह पटेल, जिला पंचायत अध्यक्ष।