बांदा। मध्य प्रदेश की बारिश का बांधों से पानी छोड़ा जा रहा है। इससे केन नदी खतरे के निशान से करीब एक मीटर ऊपर पहुंच गई है। इसके अगले 10 घंटे में दो मीटर और बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। उधर, यमुना नदी भी खतरे की निशान की ओर से तेजी से बढ़ रही है। चिल्ला में यह 94.7 मीटर पर पहुंच गई। यहां खतरे का निशान 100 मीटर पर है। केन का जल स्तर बढ़ने से जसपुरा में धोवर नाले का रपटा बह गया। करीब 20 गांवों के संपर्क कट गया। उधर, पैलानी क्षेत्र में सैकड़ों बीघा फसल जलमग्न होने से किसानों की धड़कनें बढ़ गई हैं।
जनपद में कई दिनों से बांधों से लगातार पानी डिस्चार्ज किया जा रहा है। रविवार को करीब ढाई लाख क्यूसिक मीटर पानी छोड़ा गया तो यह और उफना गई। केंद्रीय जल आयोग के मुताबिक रविवार को शाम छह बजे केन का जल स्तर 104.83 मीटर रहा। यह खतरे के निशान से करीब एक मीटर ऊपर है। इसी तरह चिल्ला में यमुना 94.7 मीटर पर रही। यहां खतरे का निशान 100 मीटर पर है। अगले दस घंटे में केन का जल स्तर 106 मीटर के ऊपर पहुंचने की संभावना। इसके लेकर प्रशासन पूरी तरह अलर्ट है। अपर जिलाधिकारी राजेश कुमार, सदर एसडीएम नमन मेहता सुबह से ही केन की बाढ़ पर निगाह बनाए रहे। मौके पर पहुंचकर लेखपालों व सचिवों को भी जरूरी निर्देश दिए।
डीएम ने किया निरीक्षण
बांदा। जिलाधिकारी जे.रीभा ने रविवार को कनवारा के मजरा छावनी डेरा एवं ब्रह्मा डेरा तथा केन आरती स्थल का राजस्व अधिकारियों के साथ निरीक्षण किया। बाढ़ की स्थिति में सतर्क रहने तथा बच्चों को नदी के समीप नहीं जाने की सलाह दी। उन्होंने ग्राम प्रधान को ग्राम में मुनादी कराकर ग्रामीणों को बाढ़ से बचाव को जागरूक करने के निर्देश दिए। उन्होंने अधिकारियों को केन नदी के मुख्य मार्ग के समीप बैरियर लगाए जाने को कहा। निरीक्षण में एडीएम राजेश कुमार, एसडीएम नमन मेहता, तहसीलदार अजय पांडेय आदि उपस्थित रहे।
किसानों को ज्वार-बाजरा की फसलें बाढ़ में डूबीं
पैलानी। केन नदी का जल स्तर बढ़ने से खप्टिहाकला के मजरा छनिहा डेरा व खप्टिहाकला में तिल,अरहर, ज्वार आदि की फसलें जलमग्न हो गई हैं। तहसीलदार राधेश्याम सिंह से किसान राजू सिंह, गुल्लू तिवारी, शिवनायक सिंह आदि ने बताया कि यहां करीब चार सौ बीघा में गजहा डेरा से लेकर गणेशन डेरा तक केन नदी किनारे बोई हुई अरहर, ज्वार बाजरा ,तिल की फसल जलमग्न हो गई है। तहसीलदार ने किसानों को भरोसा दिलाया। लेखपाल अमित सिंह पटेल से सर्वे करा कर शासन की गाइडलाइन के तहत मुआवजा दिलाए जाने को कहा। उधर, शंकरपुरवा के नीचे केन नदी किनारे की भी फसलें जलमग्न हो गई है। सिंधनकला के मजरा पंडवन डेरा,सिंधनखुर्द, में भी फसलें जलमग्न होने का खतरा मंडराने लगा है।
तेज़ बाढ़ में टूटा बरेहटा का धोवर नाला रपटा, संपर्क से कटे 23 मजरे
जसपुरा। ग्राम पंचायत बरेहटा के धोवर नाला पर बना पक्का रपटा बाढ़ में बह गया। बरेहटा सहित 23 मजरे पूरी तरह से संपर्क से कट गए हैं। अमारा, कुटी,गड़रियन डेरा, ,रामलाल का डेरा, मटेहनडेरा, खोड़, भदवा धूर ,बल्लू डेरा, मनुवां डेरा ,घीहनडेरा ,मड़ौली ,मरोला ,नया डेरा ,हजारी डेरा ,भंडारीडेरा,फकीराडेरा,खप्टिहा डेरा ,शिवरामपुर,गणेश नगर,शिवपाल डेरा ,सिमरा डेरा ,छनिहा डेरा के ग्रामीण बाढ़ से दहशत में हैं। ग्राम पंचायत बरेहटा के लक्ष्मण प्रसाद,मेवालाल,चंद्रभान,सोनू निषाद, सुनील निषाद, गुलाब,प्रमोद निषाद,फूलचंद्र निषाद, ग्राम प्रधान उर्मिला देवी बरेहटा आदि ग्रामीणों का कहना है कि यह रपटा कई साल पुराना था और मरम्मत की जरूरत थी। प्रशासन को बार-बार चेताया गया, मगर अनसुना कर दिया गया। तिंदवारी विधानसभा सपा अध्यक्ष प्रमोद निषाद ने एसडीएम व तहसीलदार को रपटा टूटने की जानकारी दी। लेखपाल अजय को मौके पर भेजा गया है।
बागै नदी की उफान से कई गांव घिरे
कमासिन। कमासिन राजापुर, प्रयागराज राजमार्ग पर लमियारी पुल के पास बह रही बागै नदी में अचानक जल स्तर बढ़ जाने से तटवर्ती गांव इटर्रा व बढ़ौनी बाढ़ के पानी से पूरी तरह से घिर गए हैं। आवागमन की एकमात्र सड़क बागै नदी के बाढ़ का पानी रपटा के डूब जाने से तथा सड़क पर कई फीट ऊपर पानी आ जाने के कारण इटर्रा गांव का संपर्क टूट गया है। इटर्रा गांव बाढ़ के पानी से घिर जाने के कारण लोगों में भय व्याप्त है। अभी तक बाढ़ राहत चौकी की स्थापना नहीं हो पाई है । प्रधान इटर्रा सुरेश सविता ने बताया कि बाढ़ के कारण मुख्य सड़क से आवागमन सभी तरह से बंद हो गया है। तहसीलदार मनोहर सिंह ने बताया कि लेखपाल सुरेश और थाना कमासिन पुलिस मौके पर है।
बारिश से ढहे कई मकान
अतर्रा। फतेहगंज क्षेत्र के ग्राम बरछा डंडिया अंश भऊआ पुरवा में तेज बारिश के चलते शारदा यादव, रामबाबू और भल्लू यादव का कच्चा मकान ढह गया। वहीं बजरंगपुर अंश डढ़वा मानपुर में राममिलन, रामपाल यादव, दिलीप कुमार और प्रेमीलाल के कच्चे मकान भी धराशायी हो गए। गनीमत रही कि इन घटनाओं में कोई जनहानि नहीं हुई, लेकिन सभी परिवारों का घरेलू सामान पूरी तरह बर्बाद हो गया। बर्तन, कपड़े, अनाज और अन्य जरूरत की वस्तुएं बारिश के पानी में भीगकर नष्ट हो गईं। सूचना मिलने पर संबंधित गांवों के लेखपाल मौके पर पहुंचे और नुकसान का आकलन किया है। पीड़ित परिवारों ने एसडीएम से शीघ्र राहत और मुआवजे की मांग की है। एसडीएम राहुल द्विवेदी ने कहा रिपोर्ट के अनुसार सभी पीड़ितों को आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी।